हरैया सतघरवा (बलरामपुर)। स्थानीय ब्लॉक के मकुनहवा कुटी में दो दिवसीय संत सम्मेलन व चौका आरती पूजन पाठ कराया गया। शुक्रवार को अंतिम दिन देश विदेश के आए संतों ने श्रद्धालुओं को आस्था के प्रति जानकारी दी। इस मौके पर शिष्य के जीवन में गुरु के महत्व को भी समझाया गया।
दो दिवसीय संत समागम में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। पंडाल में धार्मिक जयकारों की गूंज रही। कबीर पंथ के अनुसार चौका, आरती, भजन व कीर्तन के कार्यक्रम किये गए। ब्रह्मलीन हुए मकुनहवा कुटी के महंत प्रेम नरायन दास जी के समाधि स्थल पर शिष्यों ने पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि अर्पित की। महंत सुरेंद्र नाथ दास जी ने कहा कि गुरु को ईश्वर से भी ऊंचा स्थान दिया गया है। हर रूठे गुर ठौर है, गुर रूठे नहि ठौर। महंत यज्ञ नरायन दास जी महराज ने विधि विधान के साथ बीजक पाठ आरती, ध्वजारोहण व गुरु महिला का पाठ श्रद्धालुओं को सुनाया।
महंत ओम प्रकाश दास जी महराज ने कबीर साहब के जीवन वृत्त पर प्रकाश डाला और गुरु को ईश्वर से श्रेष्ठ बताया। गुरु के माध्यम से ही हमें ईश्वर के बारे में ज्ञान प्राप्त होता है। महंत निर्मल गिरि दास जी महराज ने हर व्यक्ति को अच्छे कर्म करने के लिए प्रेरित किया। कई राज्यों से आए संत महंतों ने सतनाम का पाठ विधि विधान के साथ कराया। विशाल भंडारे में क्षेत्र के तमाम श्रद्धालुओं ने प्रसाद चखा। मकुनहवा कुटी मंदिर के उत्तराधिकारी सत्य प्रकाश पाठक ने सभी साधू संतों को अंगवस्त्र भेंटकर आशीर्वाद प्राप्त किया।
नेपाल राष्ट्र से आए महा मंडलेश्वर जी महराज, दिगंबर दास जी महराज, महंत राम जीवन दास, रामानुजचार्य जी महराज, स्वामी अंनतराम देवाचार्य, कृष्णा नंद गिरि, हरिश्चंद्र दास, स्वामी अचरज सरस्वती जी महराज, सत्य सरोपानंद जी महराज, राघवानंद, ब्रह्मा स्वरूपानंद गिरि, परामंद दास जी महराज, दामोदर दास जी महराज, अद्वैनंद गिरि जी महराज समेत तमाम साधू संतों ने दो दिवसीय संत समागम में अपने अपने विचार व्यक्त किए।