फोटो-15-बलरामपुर के भंगहा कला गांव लोगों का पैसा जमा कराती बैंक सखी ।-संवाद
पिपरहवा चौराहा। आत्मविश्वास, मेहनत और स्वयं सहायता समूह के सहयोग से भंगहा कला गांव की संचिता ने अपनी अलग पहचान बनाई है। आज वह न केवल सफल व्यवसायी हैं, बल्कि बैंक सखी के रूप में ग्रामीणों को बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध कराकर महिला सशक्तिकरण की मिसाल भी बन रही हैं।
संचिता ने वर्ष 2023 में लक्ष्मी स्वयं सहायता समूह से जुड़कर 70 हजार रुपये का ऋण प्राप्त किया था। इसी राशि से उन्होंने रेडीमेड कपड़ों और कॉस्मेटिक की दुकान शुरू की। लगन और परिश्रम के बल पर उनका व्यवसाय धीरे-धीरे बढ़ता गया और आज वह आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन चुकी हैं। व्यवसाय के साथ-साथ संचिता बैंक सखी के रूप में भी कार्य कर रही हैं। वह गांव की महिलाओं और अन्य ग्रामीणों को बैंक खातों से जुड़े कार्य, जमा-निकासी, धन हस्तांतरण और अन्य बैंकिंग सुविधाओं का लाभ घर के नजदीक ही उपलब्ध करा रही हैं। इससे लोगों को बैंक तक लंबी दूरी तय करने की परेशानी से राहत मिली है। संचिता का कहना है कि स्वयं सहायता समूह ने उन्हें आगे बढ़ने का अवसर दिया। ग्रामीण महिला कृष्णावती ने बताया कि पहले बैंक जाने में काफी समय और परेशानी होती थी, लेकिन अब गांव में ही सुविधा मिलने से काम आसानी से हो जाता है। वहीं सुनीता ने कहा कि छोटे-छोटे बैंकिंग कार्यों के लिए भी दूर नहीं जाना पड़ता है।