बलरामपुर। भीषण गर्मी के चलते जिले में बिजली की खपत करीब 20 प्रतिशत बढ़ गई है। क्षमता से अधिक बिजली का उपयोग होने से आए दिन ट्रांसफार्मर जलने के साथ ही तार टूटने के कारण घंटों बिजली गायब रहती है। गर्मी और उमस के इस मौसम में ग्रामीण क्षेत्रों में जहां महज छह से आठ घंटे बिजली मिल पा रही है, वहीं नगर क्षेत्र में भी चार से छह घंटे बिजली गायब रहती है। रात में बिजली कटौती के चलते लोगों की नींद भी नहीं पूरी हो पा रही है।
अधीक्षण अभियंता अजय कुमार ने बताया कि जिले में पड़ रही भीषण गर्मी के चलते बिजली की खपत तेजी से बढ़ी है। 15 मई के बाद तुलसीपुर, उतरौला और बलरामपुर सदर डिवीजन में बिजली की मांग में करीब 20 प्रतिशत तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। बढ़ती मांग के कारण ट्रांसफार्मरों और लाइनों पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है। 15 मई से पहले जिले के तीनों डिवीजनों में औसतन करीब 85 से 90 मेगावाट बिजली की मांग थी, जो अब बढ़कर लगभग 105 से 110 मेगावाट तक पहुंच गई है। सबसे अधिक दबाव शहरी क्षेत्रों और बाजारों में देखा जा रहा है, जहां दिन-रात एसी, कूलर और पंपिंग उपकरण लगातार चल रहे हैं।
बलरामपुर सदर डिवीजन में गर्मी बढ़ने के साथ बिजली की मांग में सबसे अधिक वृद्धि दर्ज की गई है। 20 मई से पहले इस क्षेत्र में औसतन 38 से 40 मेगावाट बिजली की मांग थी, जो अब बढ़कर करीब 48 से 50 मेगावाट तक पहुंच गई है। शहर क्षेत्र में एसी, कूलर और पानी की मोटरों के अधिक इस्तेमाल से लोड तेजी से बढ़ा है। शाम के समय पीक आवर में कई फीडरों पर दबाव बढ़ने से ट्रिपिंग की समस्या भी सामने आ रही है। विभाग की ओर से अतिरिक्त निगरानी रखी जा रही है।
उतरौला डिवीजन में 20 मई से पहले बिजली की औसत मांग करीब 24 से 25 मेगावाट थी। भीषण गर्मी के बाद इसमें करीब 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है और अब मांग 30 से 32 मेगावाट तक पहुंच गई है। कस्बाई और ग्रामीण इलाकों में कूलर, पंखे और सिंचाई उपकरणों के उपयोग से लोड बढ़ा है। तुलसीपुर डिवीजन में 20 मई से पहले बिजली की मांग लगभग 22 से 23 मेगावाट थी, जो अब बढ़कर करीब 27 मेगावाट तक पहुंच गई है। नेपाल सीमा से जुड़े इस क्षेत्र में भी गर्मी के कारण घरेलू खपत तेजी से बढ़ी है। ग्रामीण इलाकों में पेयजल आपूर्ति के लिए मोटरों के अधिक संचालन से भी बिजली की मांग बढ़ी है।
नगर में 23 व ग्रामीण इलाकों में 37 बार हुई ट्रिपिंग
बिजली की मांग बढ़ने के कारण विद्युत कटौती की समस्या भी तेजी से बढ़ी है। शनिवार को जिला मुख्यालय पर 23 बार ट्रिपिंग होने के कारण बिजली काटी गई। वहीं हरैया सतघरवा, ललिया, मथुरा बाजार, गैसड़ी, पचपेड़वा, रेहरा बाजार व सादुल्लाहनगर आदि ग्रामीण क्षेत्रों में 37 से अधिक बार विद्युत कटौती हुई। तुलसीपुर व उतरौला नगर क्षेत्र में भी बार-बार बिजली कटौती होने के कारण उपभोक्ताओं को गर्मी के साथ पेयजल संकट से जूझना पड़ा।
बिजली आपूर्ति व्यवस्था चरमरा
गौरा चौराहा क्षेत्र में भीषण गर्मी में बिजली व्यवस्था चरमरा गई है। विद्युत उपकेंद्र गौरा चौराहा क्षेत्र में पिछले चार दिनों से बिजली आपूर्ति प्रभावित है। दिन भर बिजली आने-जाने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उपभोक्ता अश्विनी मिश्र, विजय पांडेय, अमरेंद्र वर्मा, सुनील शुक्ल, दुष्यंत चौधरी, विनय सिंह व संतोष श्रीवास्तव का कहना है कि लगातार हो रही अघोषित कटौती के कारण इस भीषण गर्मी में घरों में रहना मुश्किल हो गया है। दिन हो या रात, बिजली की आंख-मिचौली परेशानी का कारण बन रही है। पंखे व कूलर का हवा व मोटर के पानी को तरसना पड़ता है। ग्रामीण क्षेत्रों में 18 घंटे विद्युत आपूर्ति का दावा है, लेकिन हकीकत में आठ से 10 घंटे ही बिजली मिल पा रही है। तुलसीपुर क्षेत्र के विद्युत उपकेंद्र गौरा फीडर से ग्राम बिलोहा में पिछले एक सप्ताह से बिजली आपूर्ति ठप है। गांव का मुख्य ट्रांसफार्मर खराब होने के कारण 200 घरों में अंधेरा छाया हुआ है। भीषण गर्मी और उमस में बिजली न मिलने से बहुत परेशानी है। ग्रामीण मालिकराम, जोखू, मनके वर्मा, मुस्तकीम खान, राजुद्दीन, बिरजू, अनीश, राजेश, प्रभात, सूरज कुमार, नंदलाल व भीमसेन ने विभागीय अधिकारियों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि बार-बार शिकायत के बाद भी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। एसडीओ विद्युत राजेश कुमार ने कहा कि फाल्ट पता कराया जा रहा है, जल्द ही आपूर्ति शुरू कराई जाएगी।