फोटो-1- नगर के धर्मपुर स्थित अग्निशमन कार्यालय में खड़ी दमकल की गाड़ियां। संवाद
बलरामपुर। अप्रैल शुरू होते ही अग्निकांड की घटनाएं सामने आने लगी हैं। चंद मिनटों में आग की लपटों में घर-गृहस्थी जलकर राख हो जाती है। अग्निशमन विभाग में चालकों की कमी के कारण मदद पहुंचाने में बहुत देर जाता है। तीन तहसीलों में आठ दमकल के वाहन हैं लेकिन चालक सिर्फ तीन ही तैनात हैं। ऐसे में दमकल वाहन के संचालन में दिक्कत आ रही है। स्थिति यह है कि जब तक दमकल की गाड़ी पहुंचती है, तब तक सब कुछ जलकर राख हो जाता है।
गर्मी शुरू होते ही ग्रामीण क्षेत्रों में आग की घटनाएं होने लगी है। बीते एक सप्ताह में जिले के अलग-अलग स्थानों पर 20 से अधिक आग की घटनाएं देखने को मिली हैं। किसी भी स्थान पर समय से दमकल की गाड़ी नहीं पहुंच पाई। उतरौला क्षेत्र के पाला पाली किलोली गांव के खेत में अचानक आग लगने से 10 बीघा से अधिक पकी हुई गेहूं की फसल जलकर राख हो गई। ग्रामीणों ने ट्यूबवेल की पानी से आग बुझाने का प्रयास किया, लेकिन हवा तेज होने के कारण सफलता नहीं मिल पाई। हरैया सतघरवा क्षेत्र के सहिजना व मैनडीह गांव में आग की लपटों पर पांच झोपड़ियां जल गईं, लेकिन मदद के लिए दमकल की गाड़ी नहीं पहुंची। इसी तरह जरवा क्षेत्र के मकुनहवा नवानगर गांव में भी आग लगने से पांच परिवारों की गृहस्थी जलकर राख हो गई। जब तक दमकल कर्मी पहुंचे, सब कुछ जल चुका था। अग्निशमन विभाग में चालकों की कमी के कारण मौके पर दमकल गाड़ी नहीं पहुंच पाती है। बलरामपुर में तीन, उतरौला में तीन व तुलसीपुर तहसील में दो दमकल की गाड़ी है। प्रत्येक गाड़ी के लिए एक-एक चालक होने चाहिए। लेकिन तीन स्थानों पर सिर्फ एक-एक चालक की ही तैनाती है। ऐसे में चालकों के इधर-उधर होने के कारण गाड़ी निकालने में ही देर होती है। अग्निशमन प्रभारी अंकित कुमार ने बताया कि चालकों की कमी के कारण कभी-कभी फायर कर्मियों को ही गाड़ी चलानी पड़ती है। आग की घटना होने पर पांच मिनट के अंदर गाड़ी निकल जाती है। कभी-कभी रास्ता खराब होने के कारण भी गाड़ी पहुंचने में देरी होती है।