सोहेलवा जंगल में ट्रैकिंग प्वाइंट चिह्नित करते वनकर्मी। स्रोत विभाग
जरवा। सोहेलवा के जंगलों में बाघ की पहचान और मौजूदगी की पुष्टि को लेकर वन विभाग ने कवायद तेज कर दी है। सोमवार को वन विभाग की टीम ने पूरे क्षेत्र का भ्रमण कर ट्रांजेक्ट लाइन के लिए स्थान चिह्नित किए। अभी साइन सर्वे हो रहा है, इसमें करीब 40 मिनट चलना है। जो भी चिह्न मिलें, उनको डिजिटल एप पर रिकॉर्ड भी किया जा रहा है।
तीन दिन बाद ट्रांजेक्ट सर्वे शुरू होगा। एक जंगली रास्ता तय है, इस पर सर्वे किया जाएगा। मिलने वाले निशान के इस बार नमूने लेंगे, जिसकी जांच करने के लिए प्रयोगशाला भेजा जाएगा। इसके बाद करीब 50 से 100 कैमरे लगाए जाएंगे। जिनसे जंगल के भीतर की फोटो लिया जाएगा। इन तीनों प्रक्रिया के बाद रिपोर्ट जारी होगी। वन विभाग के मुताबिक जंगल के पांच अलग-अलग क्षेत्रों में पांच-पांच किलोमीटर के दायरे में सर्वे शुरू किया जा रहा है। इन लाइनों पर जानवरों की आवाजाही के संभावित मार्गों को तय कर निशान लगाए जाएंगे। इसके बाद उन्हीं स्थानों पर ट्रैप कैमरे स्थापित किए जाएंगे, ताकि बाघ, तेंदुआ सहित अन्य मांसाहारी और शाकाहारी वन्यजीवों की स्पष्ट तस्वीरें और गतिविधियां कैमरे में कैद की जा सकें।
यह पूरी प्रक्रिया आगामी बाघ गणना के तहत की जा रही है, जो चार साल बाद फिर से शुरू हो रही है। लगभग तीस दिनों तक चलने वाली इस गणना में जनवरी माह तक वन विभाग की टीमें जंगल में सक्रिय रहेंगी। सोहेलवा वन्यजीव प्रभाग के अंतर्गत रामपुर, जनकपुर, तुलसीपुर, भाभर, बनकटवा, बरहवा सहित सभी रेंज के बीटों में एक साथ यह कार्य होगा। डीएफओ गौरव गर्ग ने बताया कि ट्रांजिट लाइन सर्वे के दौरान वनकर्मी पदचिह्न सूचक यंत्र, दिशा सूचक यंत्र और दूरबीन की मदद से जानवरों के पंजों के निशान, मल और आवागमन के रास्तों का अध्ययन कर रहे हैं।