जिले के युवा उद्यमियों और महिलाओं के लिए अच्छी खबर है। केंद्र सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने ह्वाइट कैटेगरी (प्रदूषण रहित उद्योगों) की सूची में 50 नए उद्योग जोड़ दिए हैं। इसके साथ ही जिले में अब ऐसे 86 उद्योग लगाए जा सकेंगे, जिन्हें जल या वायु प्रदूषण नियंत्रण कानूनों के तहत अनुमति लेने की जरूरत नहीं होगी।
जिले के 50 स्वयं सहायता समूह लंबे समय से खाद्य प्रसंस्करण, पैकेजिंगी, अगरबत्ती और डिटर्जेंट पाउडर निर्माण का काम करना चाहते थे, लेकिन पर्यावरणीय अनुमति की जटिल प्रक्रिया बाधा बन रही थी। अब इन उद्योगों के ह्वाइट कैटेगरी में शामिल होने से महिलाओं के लिए स्वरोजगार के अवसर बढ़ गए हैं।
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रेहरा बाजार ब्लॉक के ग्राम सुदामापुर की जय मां दुर्गा स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष ममता देवी ने बताया कि छह महिलाएं मिलकर बेकरी और डिटर्जेंट पाउडर बनाने की योजना बना रही थीं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की मंजूरी न मिलने के कारण काम रुका था। सरकार का निर्णय हमारे लिए सुखद है।
इन उद्योगों को राहत
नई सूची में साइकिल, बेबी कैरिज, गैर मोटर चालित वाहन असेंबलिंग, बल्ब, सीएफएल, सौर पैनल, पवन ऊर्जा उपकरण, जैव उर्वरक, बेकरी, कन्फेक्शनरी, पैकिंग यूनिट, हस्तनिर्मित साबुन, डिटर्जेंट पाउडर, खेल सामग्री, बायो कीटनाशक, फोटोवोल्टिक सेल निर्माण जैसे उद्योग शामिल हैं।
रोजगार के नए द्वार खुलेंगे, आत्मनिर्भर होंगे युवा
उद्योग व्यापार मंडल के अध्यक्ष रमेश पहवा ने कहा कि पहले पर्यावरणीय मंजूरी में महीनों लग जाते थे। अब यह बाधा हटने से शहर के साथ ही तुलसीपुर और पचपेड़वा जैसे कस्बों में सैकड़ों छोटे उद्योग लगने की संभावना है। जिले की अर्थव्यवस्था को इससे बड़ा बल मिलेगा। कौशल विकास मिशन के विशेषज्ञ प्रदीप मिश्र के अनुसार यह निर्णय जिले के लिए मील का पत्थर साबित होगा। अगले छह महीनों में यहां कम से कम 500 से ज्यादा छोटे उद्योग पंजीकृत होने की संभावना है।
उद्योग स्थापना के लिए किया जा रहा प्रेरित
-नए बदलाव से उद्योग स्थापना में तेजी आएगी। करीब 100 युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया है। उन्हें नए उद्यम शुरू करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। आने वाले दिनों में कई उद्योग स्थापित होंगे।
-नीरज सिंह, उपायुक्त उद्योग