नगर के बीचोबीच बहने वाली 120 किमी लंबी सुआव नदी अब व्यापक जीर्णोद्धार योजना के साथ नए रूप में नजर आएगी। अब तक नाले के रूप में पहचानी जाने वाली सुआव को राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने आधिकारिक रूप से नदी माना है और उसकी सुरक्षा व पुनर्जीवन के लिए विस्तृत दिशा निर्देश जारी किया है। फैसला न्यायिक सदस्य अरुण कुमार त्यागी और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. अफरोज अहमद की पीठ ने पारित किया है। इस बीच प्रशासन ने अतिक्रमण हटाने, तटबंध निर्माण और बड़े पैमाने पर पौधरोपण की योजना तैयार की है।
नदी के विकास के लिए 20 मीटर चौड़ीकरण व अतिक्रमण हटाने की योजना है। इसका सर्वे बीते वर्ष हो चुका है। नदी का सीमांकन कर कब्जों को हटाया जाएगा। इससे प्रवाह सुचारु होगा और बारिश में जलभराव की समस्या भी दूर होगी। नदी किनारे बंधा बनेगा और वन विभाग के क्षेत्र में पौधरोपण कर हरित पट्टी विकसित की जाएगी। इससे कटान रुकेगा, जैव विविधता बढ़ेगी।
योजना से नगर व ग्रामीण क्षेत्रों का ड्रेनेज सिस्टम वैज्ञानिक ढंग से नदी से जोड़ा जाएगा, ताकि अनियंत्रित गंदे पानी का बहाव रोका जा सके और जलभराव से राहत मिले। कृषि, वन, ग्रामीण विकास व पंचायती राज विभाग मिलकर जलग्रहण क्षेत्र में उपचार कार्य करेंगे, जिससे मिट्टी कटाव कम होगा और जलधारण क्षमता बढ़ेगी। नदी तल की सफाई, पुराने जलाशयों का पुनर्जीवन और चयनित हिस्सों में जैव विविधता पार्क विकसित करने की भी योजना है।
वर्ष 2024 में नदी के विकास की बनी थी योजना
-19 फरवरी 2024 को जिलाधिकारी ने बाढ़ खंड व सरयू ड्रेनेज खंड-2 को संयुक्त सर्वे व कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए थे। जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जिला गंगा समिति गठित की गई थी, जिसमें प्रभागीय वनाधिकारी (सोहेलवा वन्यजीव प्रभाग) संयोजक हैं। समिति में सीएमओ, क्षेत्रीय अधिकारी यूपी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (बस्ती), ईओ नगर पालिका परिषद बलरामपुर, डीपीआरओ, अधिशासी अभियंता पीडब्ल्यूडी, सरयू नहर खंड प्रथम, महाप्रबंधक जिला उद्योग केंद्र सहित विशेषज्ञ सदस्य डॉ. दिव्य दर्शन तिवारी नामित हैं। यह समिति नदी के विकास की रिपोर्ट तैयार कर रही है।
26 फरवरी 2024 की बैठक में प्रगति, सीमांकन, अतिक्रमण कार्रवाई, एसटीपी संचालन और जनभागीदारी जैसे बिंदुओं पर चर्चा भी हो चुकी है।
श्रावस्ती की सीमा से उतरौला तक फैली है सुआव नदी
-सुआव नदी बलरामपुर-श्रावस्ती सीमा के गोपियापुर गांव से निकलकर शहर को दो भागों में बांटते हुए उतरौला के रसूलाबाद तक जाती है। इसकी लंबाई लगभग 120 किमी है। जानकार इसे राप्ती से निकली धारा मानते हैं। गजेटियर में भी यह नदी के रूप में दर्ज है।
एनजीटी ने स्पष्ट किया है कि निर्देशों के पालन में चूक पर 2010 के अधिनियम के तहत दंडात्मक प्रावधान लागू होंगे और समयबद्ध अनुपालन रिपोर्ट देनी होगी। प्रशासन का दावा है कि योजना लागू होते ही सुआव की तस्वीर बदलेगी। नाले की पहचान से निकलकर यह शहर की जीवनरेखा के रूप में उभरेगी।