बलरामपुर। सरकार की प्राथमिकता में शामिल होने के बाद भी बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मरीजों को नहीं मिल पा रहा है। प्रचार-प्रसार के अभाव में मुख्यमंत्री जन आरोग्य मेला मात्र औपचारिकता बनकर रह गई है। ग्रामीण क्षेत्र के अस्पतालों में लगने वाले आरोग्य मेले के प्रति अधिकारी भी उदासीन है। इसके चलते पीएचसी पर रविवार को जन स्वास्थ्य आरोग्य मेले में सन्नाटा पसरा रहा।
ग्रामीण क्षेत्र में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रत्येक रविवार को प्राथमिक व अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर मुख्यमंत्री जन आरोग्य मेले का आयोजन शुरू कराया है। शुरुआत में तो मेले में मरीजों की भीड़ देखी गई लेकिन बाद में अधिकारियों की उदासीनता के चलते मरीजों का आना कम हो गया है। रविवार को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र महराजगंज, कौवापुर, गुलरिहा हिसामपुर व गुगौली आदि स्थानों पर पूरी तरह सन्नाटा पसरा रहा। कुछ स्थानों पर डॉक्टर व चिकित्सा कर्मी मरीजों का इंतजार करते मिले।
कुछ स्थानों पर डॉक्टर नदारद रहे। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कौवापुर में बेटे का इलाज कराने आए रामदीन ने बताया कि स्वास्थ्य मेला में दवा के नाम पर बुखार व पेट दर्द आदि की दवाईयां ही दी जाती है। जांच के लिए बाहर भेजा जाता है। बेटे के पेट में दर्द की शिकायत पर डॉक्टर को दिखाया तो उन्होंने अल्ट्रासाउंड कराने की सलाह दी है। इसी तरह सादुल्लाहनगर, सरायखास, रेहरा बाजार, पिपरा एकडंगा व मानापार बहेरिया आदि स्थानों पर भी मरीजों ने स्वास्थ्य मेले में कागजी खानापूर्ति किए जाने की शिकायत की।
लापरवाही मिलने पर होगी कार्रवाई
प्रदेश सरकार की मंशा के अनुरूप जिले के 24 स्वास्थ्य केंद्रों पर मुख्यमंत्री जन आरोग्य मेले का आयोजन किया जा रहा है। सभी स्थानों पर डॉक्टर व चिकित्सा कर्मियों की तैनाती के साथ-साथ जांच व दवा की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराने का निर्देश प्रभारी चिकित्साधिकारियों को दिया गया है। कहीं पर भी अव्यवस्था व लापरवाही की शिकायत मिलने पर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। -डॉ. विजय बहादुर सिंह, सीएमओ