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दहेज मांगने व देने वालों को न पढ़ाएं निकाह

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बलरामपुर। दहेज प्रथा को समाप्त करने के लिए उलेमाओं ने पहल शुरू की है। शहर मुफ्ती ने जिले में उलेमाओं से अब दहेज मांगने वाले अथवा देने वालों को निकाह नहीं पढ़ाने के लिए कहा है। इसके साथ ही बारात में डीजे व नृत्य का प्रदर्शन करने वालों को भी निकाह नहीं पढ़ाने की बात कही है।
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जामिया अरबिया अनवारूल कुरान अरबी डिग्री कॉलेज के प्राचार्य व शहर मुफ्ती मौलाना मसीह अहमद कादरी ने कहा कि शरीयत-ए मोहम्मदी में लड़की वालों से दहेज मांगना नाजायज है। दहेज लेना कानूनन अपराध भी है। लड़की के घर वाले अपनी मर्जी से जो कुछ भी उपहार भेंट करें उसे खुशी-खुशी कुबूल कर लेना चाहिए।
वहीं जहां पर लड़के वाले दहेज मांगते हैं वहां पर उलेमा निकाह पढ़ाने न जाएं। शादी में डीजे अथवा नाच-गाने का प्रदर्शन हो उसका भी बहिष्कार उलेमा करें। मौलाना मोहम्मद शमीम अहमद कादरी ने कहा कि पैगंबर ए इस्लाम मोहम्मद साहब ने शादियों में दहेज मांगने, खड़े होकर खाना खाने और नाच-गाना करने को नाजायज माना है। हमें शरीयत ए मोहम्मदी का पालन करते हुए उनके बताए गए मार्ग पर चलना चाहिए।
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टीचर्स एसोसिएशन मदारिस ए अरबिया के महामंत्री व जिला कोआर्डिनेटर मौलाना फैय्याज अहमद मिस्बाही ने कहा कि लड़की वालों से दहेज की मांग करना व शादियों में दहेज की नुमाइश लगाना गलत है। दहेज के चलते तमाम गरीब बेटियों की शादी नहीं हो पाती है। हाल ही में एक बेटी ने जो कि गुजरात की है सोशल मीडिया पर अपनी पीड़ा बताकर आत्महत्या कर ली। तमाम बेटियों को शादी के बाद भी दहेज के चलते कई कठिनाईयों का सामना करना पड़ता है।
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