उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल के प्रांतीय अध्यक्ष बनवारी लाल कंछल नेपाल के देउखुरी उद्योग वाणिज्य संघ की ओर से लमही में आयोजित सीमा व्यापार सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने नेपाल के व्यापारियों को भरोसा दिया कि भारत-नेपाल सीमा के कोयलाबास बॉर्डर को फिर से व्यापार के लिए सक्रिय बनाने का अभियान तेज होगा। सीमा पार के व्यापारियों से तालमेल को मजबूत किया जाएगा। यह सम्मेलन इसमें मील का पत्थर साबित होगा।
सम्मेलन में नेपाली वाणिज्य संघ ने मसौदा तैयार किया, जिसमें जरवा कस्टम की सीमा 25 हजार से 25 लाख तक किए जाने की मांग शामिल रही। उन्होंने कहा कि सीमा पर सहूलियत दी जाए ताकि व्यापारी बिना अनावश्यक औपचारिकताओं के लेन-देन कर सकें। भारत में गंभीर रोगों के इलाज के लिए नेपाली नागरिकों को विशेष छूट और सहायता प्रदान की जाए। सीमावर्ती इलाके में आपात स्थितियों के लिए एंबुलेंस सेवा की स्थायी व्यवस्था की जाए।
कार्यक्रम में शामिल तुलसीपुर व्यापार मंडल अध्यक्ष श्याम बिहारी अग्रहरि ने कहा कि भारत और नेपाल की सरकारें आपसी समझ और संवाद से सीमा व्यापार को फिर से नई ऊंचाई दे सकती हैं। यह केवल व्यापार नहीं, बल्कि दोनों देशों की लोकसंस्कृति और भाईचारे का प्रतीक है।उन्होंने कहा कि “तरक्की का द्वार अभियान” का उद्देश्य यही है कि सीमावर्ती इलाके में आर्थिक गति, सामाजिक विकास और सांस्कृतिक एकता को मजबूत करना है।
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साझा विकास की दिशा में बढ़ेगा कदम
सम्मेलन से संकेत मिला कि कोयलाबास बॉर्डर के पुनर्जीवित होने से न केवल व्यापार बढ़ेगा, बल्कि सीमावर्ती इलाकों में रोजगार, पर्यटन और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के नए अवसर भी खुलेंगे। दोनों देशों के व्यापारिक संगठनों ने संयुक्त रूप से संकल्प लिया कि सीमा पर व्यापारिक और सामाजिक संबंधों को नए सिरे से सशक्त किया जाएगा। सम्मेलन में घोराही वाणिज्य संघ अध्यक्ष बसंत जोशी, लीला राम खनाल, शेषदत्त चौधरी, केशव राज पोखरेल, रिजवान बबलू, राधेश्याम चौरसिया, प्रदीप गुप्ता, कुंदन लाल गुप्ता, अकबर अली, अनिल मंत्री, ईश्वर श्रेष्ठ, गढ़वा अध्यक्ष ओमप्रकाश बैसाल, भालुबांग अध्यक्ष सूरज खड़का मौजूद रहे। समारोह का संचालन महासचिव हरि थापा ने किया।
सीमा व्यापार में संभावनाओं का नया द्वार
-व्यापारी नेता बनवारी लाल कंछल ने कहा कि कोयलाबास बॉर्डर कभी भारत-नेपाल के बीच व्यापार का प्रमुख मार्ग हुआ करता था, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से यहां व्यापारिक गतिविधियां लगभग ठप हो चुकी हैं। यहां परिवहन अवरोध, सीमा पर आवश्यक सुविधाओं की कमी और कस्टम प्रक्रिया में जटिलता को जल्द दूर कराया जाएगा।
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लमही सम्मेलन में दिखी भारत-नेपाल व्यापारिक प्रगाढ़ता
कार्यक्रम के दौरान देउखुरी उद्योग वाणिज्य संघ लमही के अध्यक्ष कमल सिंह ने मुख्य अतिथि का स्वागत किया। नगर महामंत्री रूपचंद्र गुप्ता ने कोयलाबास बॉर्डर को पुनः सक्रिय करने पर जोर दिया। लमही के अध्यक्ष कमल सिंह ने कहा कि कोयलाबास कस्बा पूरी तरह निष्क्रिय हो चुका है। यह भारत पहुंचने का सबसे नजदीकी मार्ग है। मात्र 33 किलोमीटर दूर। इसके विपरीत नेपालगंज और कृष्णानगर की दूरी अधिक है।