अस्पताल में इलाज कराने आए महावीर उपाध्याय बाहर से लिखे दवा का पर्चा दिखते।
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बलरामपुर। अस्पतालों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध होने का सरकारी दावा जिले में हवा हवाई साबित हो रहा है। अस्पतालों में उपलब्ध होने के बावजूद मरीजों को आवश्यक दवाएं नहीं मिल पा रही हैं। डॉक्टर खुलेआम मरीजों को बाहर की दवा लिख रहे हैं। अस्पताल में दवा न मिलने पर मरीज मेडिकल स्टोर से महंगे दामों पर दवाएं खरीदने को विवश होते हैं। प्राथमिक व अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर एंटी रैबीज व एंटी स्नैक वैक्सीन उपलब्ध न होने के कारण पीड़ितों को वैक्सीन लगवाने के लिए जिला अस्पताल अथवा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर जाना पड़ता है।
आकांक्षात्मक जनपद होने के कारण नीति आयोग द्वारा बलरामपुर जिले में शिक्षा व स्वास्थ सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। अस्पतालों में डॉक्टर व संसाधनों की उपलब्धता के साथ-साथ दवाओं की उपलब्धता भी सुनिश्चित की गई है। जिला मेमोरियल चिकित्सालय के फार्मासिस्ट व औषधि भंडार प्रभारी नैय्यर अजीज के अनुसार अस्पताल में करीब 220 दवाएं उपलब्ध हैं। जो आवश्यक दवाएं उपलब्ध नहीं हैं उनके लिए लोकल खरीदारी की सुविधा भी प्राप्त है। इसी तरह जिला महिला चिकित्सालय के चीफ फार्मासिस्ट सलिल कुमार गुप्ता ने बताया कि अस्पताल में सभी आवश्यक दवाएं उपलब्ध हैं। दवाएं कम होते ही उत्तर प्रदेश मेडिकल कॉर्पोरेशन को डिमांड भेज दी जाती है। कुछ दवाओं के लिए डिमांड भेजी भी गई है।
अस्पतालों में सभी दवाएं उपलब्ध होने का दावा भले ही संबंधित कर्मियों द्वारा किया जा रहा है लेकिन वास्तविकता यह है कि मरीजों को अस्पताल से एक-दो दवाओं को छोड़कर महंगी दवाएं नहीं मिल पाती हैं। अधिकांश डॉक्टर मरीजों को बाहर की दवा लिखते हैं। बीते दिनों जिला संयुक्त चिकित्सालय में निरीक्षण के लिए आई राज्य महिला आयोग की सदस्य सुनीता बंसल से तमाम मरीजों ने डॉक्टरों द्वारा बाहर से दवा लिखे जाने की शिकायत की थी। महिला आयोग की सदस्य ने डॉक्टरों को बाहर की दवा न लिखने का निर्देश दिया था इसके बावजूद डॉक्टर खुलेआम बाहर की दवा लिख रहे हैं।
बुधवार को जिला मेमोरियल चिकित्सालय में दांत का इलाज कराने आई मोहल्ला गोविंद बाग निवासी शाहजहां ने बताया कि उन्हें डॉक्टर ने बाहर की दवा लिखी है। दवा महंगी होने के कारण बाहर से दवा ले पाने में वह असमर्थ है। हरिहरगंज बाजार निवासी महावीर उपाध्याय ने बताया कि उन्हें सर दर्द व बुखार है। डाक्टर ने उन्हें बाहर की दवा लिखी है। इनका कहना है कि जब मामूली बुखार की दवा अस्पताल में नहीं है तो फिर कौन सी दवा मिलेगी।
शहरी अस्पतालों व सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर एंटी रैबीज व एंटी स्नैक वैक्सीन उपलब्ध है। अधिकांश प्राथमिक व अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर एंटी रैबीज वैक्सीन उपलब्ध न होने के कारण कुत्ता व बंदर के काटने पर पीड़ितों को वैक्सीन के लिए सामुुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर जाना पड़ता है। अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र महराजगंज तराई के डाक्टर सुहेल खां ने बताया कि पीड़ितों को एंटीरैबीज इंजेक्शन के लिए सीएचसी तुलसीपुर या जिला अस्पताल भेजा जाता है।
सीएमओ डॉ. घनश्याम सिंह ने बताया कि जिले के सभी अस्पतालों में आवश्यक दवाएं पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। डाक्टरों को अस्पताल की ही दवाएं लिखने का निर्देश दिया गया है। बाहर से दवा लिखने की शिकायत पर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
बलरामपुर के जिला मेमोरियल अस्पताल में दवा लेने के लिए कांउटर पर जुटे मरीज।- फोटो : BALRAMPUR