बलरामपुर। एवरेस्ट कैंप अभियान में हिस्सा लेने के लिए जिले से रवाना हुईं तीनों प्रतिभाशाली बेटियां शुक्रवार को नेपाल पहुुंच गई। अब वह बेस कैंप से एवरेस्ट की चोटी तक पहुंचने के लिए चढ़ाई शुरू करेंगी। सीमित संसाधन, आर्थिक तंगी और ग्रामीण परिवेश की चुनौतियों के बीच जिले की इन तीन बेटियों ने अपने हौसले और मेहनत से एवरेस्ट की गगनचुंबी चोटी को छूने का जज्बा दिखाकर एक मिसाल कायम की है। कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय पचपेड़वा की छात्रा नीलांशु, डीएवी इंटर कॉलेज की छात्रा प्रियंका उपाध्याय व कंपोजिट स्कूल रामनगरा की प्रियंका प्रजापति ने खेल के मैदान में लगातार संघर्ष और बेहतर प्रदर्शन के दम पर इन छात्राओं का चयन एवरेस्ट कैंप के लिए हुआ है।
यह तीनों बेटियां सरकारी शिक्षण संस्थान से हैं। बेटियों ने खेल के दम पर अलग-अलग विधा में अपना वर्चस्व बनाया है। इसके आधार पर ही इनका चयन एवरेस्ट कैंप के लिए हुआ है। बीएसए शुभम शुक्ल ने बताया कि एवरेस्ट कैंप के लिए चयनित होकर तीनों बेटियों ने यह साबित कर दिया कि मेहनत और लगन के आगे अभाव भी छोटे पड़ जाते हैं। इन तीनों छात्राओं का चयन विभिन्न चरणों के ट्रायल के बाद किया गया। बेटियों की इस उपलब्धि से जिले में खुशी का माहौल है। शिक्षकों, अभिभावकों और प्रशासनिक अधिकारियों ने इसे महिला सशक्तीकरण की प्रेरक मिसाल बताया है।
सीडीओ हिमांशु गुप्त ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों से निकलकर बेटियों का राष्ट्रीय स्तर के अभियान तक पहुंचना यह संदेश दे रहा है कि अवसर मिलने पर बेटियां किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं। उन्होंने कहाकि आगे भी खेल प्रतिभाओं को निखारने के लिए बेहतर प्रयास किए जाएंगे।
पढ़ाई के साथ इतिहास रचने को बढ़ाए कदम
कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय पचपेड़वा की छात्रा नीलांशु ने कठिन परिस्थितियों के बावजूद खेल के प्रति अपना जुनून कभी कम नहीं होने दिया। दौड़ प्रतियोगिताओं में लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन कर उन्होंने कई पदक जीते। सीमित सुविधाओं के बावजूद रोजाना अभ्यास और आत्मविश्वास के बल पर उन्होंने यह मुकाम हासिल किया। इसी तरह डीएवी इंटर कॉलेज की छात्रा प्रियंका उपाध्याय हैंडबॉल की प्रतिभाशाली खिलाड़ी हैं। परिवार की आर्थिक चुनौतियों के बीच उन्होंने खेल को अपनी पहचान बनाया। वहीं कंपोजिट स्कूल रामनगरा की प्रियंका प्रजापति क्रिकेट ने क्रिकेट में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा कर यह मुकाम हासिल किया है।
डीएम विपिन कुमार जैन ने बताया कि सीमित संसाधनों के बावजूद छात्राओं ने जिस मेहनत और आत्मविश्वास के साथ यह उपलब्धि हासिल की है, वह पूरे जिले के लिए गर्व की बात है। प्रशासन बेटियों को आगे बढ़ाने और उन्हें बेहतर अवसर देने के लिए लगातार प्रयासरत है। हर मूवमेंट की जानकारी की जा रही है।