बलरामपुर के एमएलके पीजी कॉलेज में आयोजित संगोष्ठी में मौजूद शिक्षक व विद्यार्थी।-स्रोत: महाविद
बलरामपुर। एमएलके महाविद्यालय के सभागार में चल रही दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन रविवार को हुआ। संगोष्ठी में विशेषज्ञों ने साइबर अपराध के कारण व निवारण पर चर्चा करते हुए इसकी रोकथाम के लिए जागरूक होने पर जोर दिया। साथ ही साइबर अपराध का शिकार होने पर वैधानिक कार्रवाई के संबंध में भी जानकारी साझा की गई।
रविवार को साइबर क्राइम भारत में मुद्दे, चुनौतियां और सुरक्षा विषय पर आयोजित संगोष्ठी के समापन सत्र की अध्यक्षता प्रो. पीके सिंह ने की। उन्होंने कहा कि आईक्यूएसी व महाविद्यालय के बीसीए विभाग द्वारा आयोजित यह संगोष्ठी साइबर अपराध के प्रति जागरूकता के लिए महत्वपूर्ण साबित होगी। वर्तमान परिदृश्य में विकास के लिए जहां आधुनिक तकनीक आवश्यक है वहीं इसके प्रति जागरुकता भी जरूरी है। किसी भी तकनीक का इस्तेमाल हम कितनी जागरूकता से करते हैं, वहीं हमारी सुरक्षा का कारण बनता है।
संगोष्ठी के समन्वयक डॉ. सदगुरु प्रकाश ने कहा कि जैसे-जैसे दुनिया डिजिटलीकरण के क्षेत्र में आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे साइबर अपराध का खतरा भी बढ़ता जा रहा है। भारत भी साइबर अपराध से अछूता नहीं है। सत्यम पांडेय ने मोबाइल हैकिंग के बारे में जानकारी देते हुए मोबाइल हैक होने पर बरती जाने वाली सावधानियों पर चर्चा की। सांयकालीन सत्र में राम स्वरूप कॉलेज लखनऊ के डॉ. शशांक शेखर ने साइबर अपराध का शिकार होने पर किस तरह की वैधानिक कार्रवाई की जानी है, इस संबंध में जानकारी दी।
डॉ. बीएल गुप्त ने दो दिनों तक चली संगोष्ठी की रिपोर्ट को प्रस्तुत किया। डॉ. मसूद मुराद ने अतिथियों का स्वागत एवं बीसीए के विभागाध्यक्ष अभिषेक सिंह ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर महाविद्यालय के मुख्य नियंता राघवेंद्र सिंह सहित सभी शिक्षक व विद्यार्थी मौजूद रहे।