फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मोबाइल नेटवर्क की घुसपैठ से देश की सुरक्षा को खतरा

विज्ञापन
विज्ञापन
टॉप बॉक्स :
विज्ञापन

मोबाइल नेटवर्क की घुसपैठ से देश की सुरक्षा को खतरा
- भारतीय सीमा के 15 किमी अंदर तक नेपाली नेटवर्क सक्रिय
- एसएसबी ने गृह मंत्रालय को भेजी रिपोर्ट
लालजी सिंह/प्रभाकर कसौधन
अमर उजाला ब्यूरो
बलरामपुर-देवीपाटन। जनपद की खुली नेपाल सीमा पर दोनों देशों के मोबाइल नेटवर्क एक दूसरे के क्षेत्र में धड़ल्ले से काम कर रहे हैं। मोबाइल नेटवर्क की घुसपैठ का फायदा उठाकर राष्ट्रविरोधी तत्व देश की सुरक्षा के लिए खतरा उत्पन्न कर सकते हैं। इस बात की चिंता अब सीमा सुरक्षा में लगी एसएसबी को भी सताने लगी है। एसएसबी ने मामले की रिपोर्ट गृह मंत्रालय को भी भेज दी है।
विदित हो कि देश के लोगों का नेपाल से मैत्री संबंध होने के कारण रोटी-बेटी का संबंध सदियों से चला आ रहा है। सूचना क्रांति का विकास तो हुआ लेकिन नेपाल सीमा पर इसकी उपयोगिता व प्रतिबंध पर आज तक कोई खास ध्यान नहीं दिया गया। आलम यह है कि दोनों देशों का नेटवर्क एक दूसरे की सीमा में धड़ल्ले से काम कर रहा है। नेपाल राष्ट्र का नेपाली नेटवर्क एनसीएल जिले की सीमा में करीब 10-15 किमी अंदर तक काम कर रहा है। लोग इसका इस्तेमाल भी करते हैं। यही आलम भारतीय मोबाइल नेटवर्क बीएसएनएल का भी है। यह नेटवर्क भी नेपाल के कोईलाबास व कृष्णानगर में काम करता है। मोबाइल नेटवर्क की घुसपैठ का फायदा राष्ट्रविरोधी तत्व उठा सकते हैं इस संभावना से कतई इंकार नहीं किया जा सकता। सीमा सुरक्षा के लिए सीमा पर तैनात सशस्त्र सीमा बल को भी नेटवर्क घुसपैठ की चिंता सताने लगी है। ऐसा इसलिए है कि आए दिन सीमा पर मादक द्रव्यों, नकली करेंसी व मानव तस्करी आदि की घटनाएं सामने आती रहती है। इन अवैध काम में लगे लोग भी इस नेटवर्क घुसपैठ का नाजायज फायदा उठा सकते हैं। वहीं यह भी देखा जा रहा है कि भारत में कार्यरत प्राइवेट मोबाइल कंपनियों के नेटवर्क में घुसपैठ की कोई संभावना ही नहीं है। इन कंपनियों के नेटवर्क भारतीय सीमा के बाद कदापि काम नहीं करते।
विज्ञापन
विज्ञापन

वर्जन
- भारत का बीएसएनएल नेटवर्क नेपाल में तथा नेपाल का एनसीएल नेटवर्क भारत के सीमावर्ती क्षेत्रों में काम करता है। इस मुद्दे को कई बार दोनों देशों की मैत्री बैठक में उठाया जा चुका है। मामले की रिपोर्ट गृह मंत्रालय भारत सरकार को भेजी गई है।
जर्नादन मिश्र, उप सेनानायक 50वीं वाहिनी एसएसबी
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें