बलरामपुर। जिले की नेपाल सीमा से सटी सोहेलवा सेंक्चुरी को नेपाली वन माफिया अवैध कटान कर खोखला कर रहे हैं। विभागीय और स्थानीय वन माफियाओं की मिलीभगत से यह लोग कीमती लकड़ियों को काटकर साइकिल से पगडंडी के रास्ते नेपाल पहुंचा रहे हैं। वन विभाग जंगल के विनाश को रोक पाने में असमर्थ दिख रहा है। नेपाली वन माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हैं कि जंगल की सुरक्षा में लगे वनकर्मियों को भी मारने से पीछे नहीं हटते। कई बार वन माफियाओं और वन सुरक्षाकर्मियों के बीच संघर्ष हुआ है।
विदित हो कि 452 वर्ग किलोमीटर में फैले सोहेलवा संरक्षित वन क्षेत्र का दायरा बढ़ने के बजाए सिकुड़ता जा रहा है। वन माफिया अवैध कटान करके वन क्षेत्र खोखला कर रहे हैैं। संसाधनों के अभाव में वन विभाग अवैध कटान पर प्रभावी अंकुश नहीं लगा पा रहा है। प्राकृतिक व वानस्पतिक रूप से समृद्ध तराई क्षेत्र का ये जंगल अपने अस्तित्व के लिए जूझ रहा है। वन माफिया बेखौफ होकर बेशकीमती पेड़ों पर आरी चला रहे हैं। वन क्षेत्र में करीब 20 हजार जैव विविधताएं पाई जाती हैं। यहां साखू, सागौन, काले शीशम के साथ-साथ तमाम तरह की औषधीय वनस्पतियां पाई जाती हैं। वन क्षेत्र रॉयल बंगाल टाइगर का प्राकृतिक वास कहा जाता है। इस जंगल में तेंदुआ, चीतल, हिरन व बारहसिंगा समेत तमाम जानवर पाए जाते हैं।
वनमाफियाओं के बीच होती रहती मुठभेड़
जंगल में आए दिन वन विभाग व एसएसबी की तरफ से अवैध कटान की धरपकड़ से ये स्पष्ट होता है कि जंगल के आसपास बसे गांवों के लोगों का जीवन भी जंगल पर ही आश्रित है। जलौनी के नाम पर प्रतिदिन तमाम लकड़ी काटकर ढोई जाती है। खुली सीमा होने के चलते सोहेलवा सेंचुरी में भारतीयों के साथ-साथ नेपाली भी अवैध कटान व वन्यजीवों के शिकार में लिप्त हैं। बीते वर्षों में भांभर रेंज के एक वनकर्मी की अवैध कटान कर रहे नेपाली वन माफियाओं ने हत्या कर दी थी।
ठोस कार्रवाई की जा रही
डीएफओ बलरामपुर प्रखर गुप्ता का कहना है कि सोहेलवा संरक्षित वन क्षेत्र में अवैध कटान रोकने के सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। सुरक्षा कर्मियों की टीम एसएसबी जवानों के साथ लगातार कांबिंग कर वन माफियाओं की धरपकड़ कर रही है। अवैध कटान पर प्रभावी अंकुश लगाने के सभी प्रयास किए जा रहे हैं।