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पर्यटन के 85 करोड़ की परियोजना पर कोरोना का ग्रहण

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बलरामपुर। सीएम योगी आदित्यनाथ के ड्रीम प्रोजेक्ट थारू संस्कृति व पर्यटन के 85 करोड़ की परियोजना के काम पर कोरोना का कहर टूटा है। थारू जनजाति की प्राचीन परंपराओं को विकसित करने पर ग्रहण लग गया है। कोविड-19 के चलते चालू वित्तीय वर्ष में ईको टूरिजम विकसित करने का सपना अधूरा रह जाएगा। शक्तिपीठ देवीपाटन मंदिर से सोहेलवा वन क्षेत्र तक ईको टूरिजम का जाल बिछाने का प्रस्ताव तैयार किया गया था। कोरोना वायरस का बढ़ता संक्रमण थमने के बाद ही ईको टूरिजम विकसित करने का सपना साकार हो सकेगा।
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वित्तीय वर्ष 2020-21 में पर्यटन परियोजनों के सपनों को उड़ान के पंख लगने थे लेकिन कोरोना के चलते परियोजना का काम अभी तक शुरू नहीं हो सका है। वित्तीय वर्ष 2019-20 में जिला प्रशासन ने थारू संस्कृति व पर्यटन के विकास पर 85 करोड़ रुपये खर्च किए जाने की योजना तैयार की थी। पर्यटन विकास से जिले को नई पहचान दिलाने के लिए शक्तिपीठ देवीपाटन मंदिर से थारू जनजाति की प्राचीन परंपराओं को ईको टूरिजम से जोड़ने का प्रस्ताव रखा गया था।
सोहेलवा वन क्षेत्र देश के साथ ही विदेशी सैलानियों को भी अपनी तरफ आकर्षित कर रहा है। प्रशासन ने ईको टूरिजम में प्राकृतिक जलाशय चित्तौड़गढ़ के किनारे थारू हट का निर्माण कराने की कार्ययोजना तैयार की थी। थारू जनजाति की शैली पर आधारित हट में सैलानियों को ठहरने और उनके मनोरंजन के सभी इंतजाम का खाका तैयार किया गया था।
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प्राकृतिक जलाशय के किनारे बने बांध पर साइकिल ट्रैक और नीचे कार पार्किंग की व्यवस्था का ख्याल रखा गया था। थारू जनजाति के लोगों का राइस महुआ बीयर पसंदीदा खाद्य पदार्थ है। थारुओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए राइस महुआ बीयर को पर्यटन में शामिल किया।
इमीलिया कोडर व थारू गांव को भी ईको टूरिजम के हिस्से में शामिल किया गया। गांव में पहले से बने पंडित दीनदयाल शोध संस्थान, मिनी स्टेडियम व संग्रहालय को भी ईको टूरिजम के हिस्से में जोड़ने का प्रस्ताव रखा गया। शक्तिपीठ देवीपाटन मंदिर, सोहेलवा सेंक्चुरी, प्राकृतिक जलाशय चित्तौड़गढ़ व थारू जनजाति की प्राचीन परंपराओं को सहेजकर जिले में 85 करोड़ रुपये से ईको टूरिजम विकसित करने के प्रस्ताव पर कोरोना का कहर टूटा है। ईको टूरिजम विकसित न होने से जिले के 25 लाख लोगों को घूमने व आनंद लेने के अरमानों पर कोरोना ने पानी फेरा है।
डीएम कृष्णा करुणेश ने बताया कि कोरोना संक्रमण के बढ़ते प्रकोप के चलते सीएम के ड्रीम प्रोजेक्ट थारू संस्कृति व पर्यटन के 85 करोड़ की परियोजना के काम अभी तक शुरू नहीं किया जा सका है। वित्तीय वर्ष 2020-21 में शासन से बजट मिलने के बाद सीएम के ड्रीम प्रोजेक्ट शुरू होने की संभावना थी। कोरोना का संक्रमण थमने के बाद ही थारू संस्कृति व पर्यटन के विकास योजना शुरू होने की संभावना है।
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