बलरामपुर। मंगलवार का दिन निकाय चुनाव के आरक्षण के नाम रहा। प्रस्तावित आरक्षण को लेकर हर कोई अपनी-अपनी राय रख रहा था। इन सबके बीच पांचों निकायों के अध्यक्ष पद की कुर्सी अनारक्षित होने के कारण दावेदारों की भागदौड़ तेज हो गई है। टिकट के लिए भाजपा में तीन व सपा में दो और आवेदन आए हैं। हालांकि पार्टी के अध्यक्ष अभी कुछ भी कहने से बच रहे हैं।
जिले में वर्ष 2017 में चार निकायों में चुनाव हुआ था। उस वक्त बसपा के टिकट पर बलरामपुर नगर पालिका परिषद से किताबुन्निशा व उतरौला नगर पालिका परिषद से सपा के मोहम्मद इदरीश खां ने अध्यक्ष पद पर जीत हासिल की थी। जबकि पचपेड़वा व तुलसीपुर में निर्दल ने जीत हासिल की थी। उस वक्त भाजपा व कांग्रेस का पत्ता नहीं खुला था। रही बात आरक्षण की तो पिछले चुनाव में तीन निकाय महिला व एक अनारक्षित थी।
इस बार समीकरण में बदलाव हुआ है। जिले की पांचों निकायों के अध्यक्ष की कुर्सी प्रस्तावित आरक्षण में अनारक्षित वर्ग में शामिल की गई है। इसके बाद से अब हर किसी के मैदान में उतरने का रास्ता साफ हो गया है। गैसड़ी को पहली बार नगर पंचायत बनाया गया है। ये भी अनारक्षित है।
भाजपा जिलाध्यक्ष प्रदीप सिंह कहते हैं कि मंगलवार को नगर पालिका परिषद बलरामपुर से अध्यक्ष पद के लिए तीन और आवेदन आए हैं। इससे ज्यादा कुछ नहीं बताया जा सकता। वहीं, सपा में पचपेड़वा व उतरौला अध्यक्ष पद के लिए एक-एक और नेता ने दावेदारी पेश की है। सपा जिलाध्यक्ष परशुराम वर्मा का कहना है कि आवेदन आने दीजिए, पार्टी नेतृत्व के निर्देश पर निर्णय लिया जाएगा।
निकाय अध्यक्ष पद के लिए प्रस्तावित आरक्षण सूची जारी होने के साथ ही रणनीति को लेकर मंथन शुरू हो गया है। वर्ष 2017 में एक भी सीट पर जीत न हासिल करने वाली भाजपा ने बूथवार प्लानिंग की है। हालांकि सबसे अधिक टिकट के दावेदार भाजपा में ही हैं। सपा व बसपा ने भी चुनावी माहौल को देखते हुए योजना को धरातल पर उतारने की कवायद तेज कर दी है।
सोमवार शाम से ही सोशल मीडिया पर दावेदारों की बाढ़ सी आ गई है। बलरामपुर नगर पालिका परिषद से ही अब तक 30 से अधिक दावेदार सोशल मीडिया पर अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुके हैं। सोशल मीडिया बहस का अड्डा भी बन गया है। यही नहीं, बड़ा पुल चौराहे पर मंगलवार को लोग आरक्षण को लेकर चुनावी चर्चा करते दिखे।