बलरामपुर। ग्राम पंचायतों में स्वच्छ भारत मिशन के तहत होने वाले विकास कार्यों का एमबी (मापन पुस्तिका) व स्टीमेट (प्राक्कलन) अब कंसल्टिंग इंजीनियर ही तैयार करेंगे। इस संबंध में पंचायती राज निदेशक अटल कुमार राय ने विभाग को पत्र लिखा है।
पंचायतों में होने वाले विकास कार्यों को गति देने के लिए शासन स्तर पर वर्ष 2022 में कंसल्टिंग इंजीनियरों की तैनाती की गई थी। जिले के नौ ब्लॉकों में 22 इंजीनियर कार्यरत हैं। दो साल बीत जाने के बाद भी गांवों में स्वच्छ भारत मिशन के तहत होने वाले विकास कार्यों का स्टीमेट व एमबी गैर विभागों के इंजीनियर ही बनाते हैं। सचिव व ग्राम प्रधान की मिलीभगत से पंचायती राज विभाग के कंसल्टिंग इंजीनियरों से काम नहीं लिया जा रहा है। इसकी शिकायत इंजीनियरों ने उच्चाधिकारियों से की थी।
मामले को संज्ञान में लेते हुए पंचायती राज निदेशक ने कंसल्टिंग इंजीनियरों से काम लेने का निर्देश दिया है। एमबी व स्टीमेट तैयार करने के लिए कंसल्टिंग इंजीनियरों को विकास कार्यों के लागत का दो प्रतिशत कमीशन के रूप में मानदेय दिया जाएगा। एमबी व स्टीमेट तैयार करने के लिए इंजीनियरों को विशेष तौर पर प्रशिक्षण भी दिया गया है।
जिले के कंसल्टिंग इंजीनियर रवि कुमार वर्मा, रजनीश कुमार व अनुराग पांडेय ने बताया कि ग्राम प्रधान व सचिव हम लोगों से काम नहीं लेते हैं। गैर विभागीय इंजीनियरों से लागत बढ़ाकर स्टीमेट बनवाकर सरकारी धन का बंदरबांट करते हैं। अब निदेशक ने पत्र लिखा है तो हम लोगों को उम्मीद जगी है। निदेशक ने ग्राम पंचायतों में स्वच्छ भारत मिशन के साथ-साथ अन्य विकास कार्यों के स्टीमेट व एमबी कंसल्टिंग इंजीनियरों से बनवाने के लिए जिलाधिकारी को पत्र लिखा है।