बलरामपुर। स्वास्थ्य विभाग में हुई अनियमितताओं की एसआईटी जांच शुरू होते ही हड़कंप मच गया है। जांच में सहयोग न करने वाले चार लिपिकों का सीएमओ ने तत्काल प्रभाव से पटल बदल दिया है। यही नहीं इन लिपिकों के कमरों में दूसरा ताला भी जड़ दिया गया है। ऐसा अभिलेखों की हेराफेरी की आशंका को देखते हुए किया गया है। जांच में कई बाबुओं पर गाज गिरना तय माना जा रहा है।
गौरतलब है कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत दवाओं व उपकरणों की खरीद व आपूर्ति तथा मेंटीनेंस आदि कार्यों में करोड़ों रुपये के घोटाले की शिकायत की गई थी। श्रावस्ती जनपद के भिनगा से बसपा विधायक असलम राईनी ने पूरे मंडल में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत हुए घोटाले का मामला विधानसभा में उठाया था। शासन ने इसे गंभीरता से लेते हुए मामले में एसआईटी जांच का आदेश दिया है।
बीते दिनों एसआईटी जांच के लिए सीएमओ बलरामपुर के दफ्तर पहुंची थी। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार टीम ने संबंधित लिपिकों से जरूरी अभिलेख उपलब्ध कराने को कहा था। बार-बार रिमांडर के बाद भी अभिलेख न मिलने पर टीम ने शासन को पत्र लिखा। एसआईटी के पत्र पर स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारी हरकत में आ गए। अधिकारियों ने इस बावत नवागत सीएमओ डॉ. विजय बहादुर सिंह को कड़ी कार्रवाई का निर्देश दिया।
उच्चाधिकारियों के निर्देश पर सीएमओ ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के लेखाकार पंकज त्रिपाठी, एसएमओ स्टोर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन डीके पांडेय, एसएमओ स्टोर राज्य बजट केके मालवीय तथा लिपिक जगदीश सिंह को तत्काल प्रभाव से उनके पटल से हटा दिया है। यही नहीं पंकज त्रिपाठी के कमरे में सीएमओ ने दूसरा ताला भी जड़वा दिया है। अभिलेखों में कोई हेराफेरी न हो, इसके लिए सीएमओ ने ताला लगवाने की बात कही है।
केके मालवीय तथा डीके पांडेय के काम सीएचसी उतरौला के चीफ फार्मासिस्ट एमएम त्रिपाठी देखेंगे। जगदीश सिंह का प्रभार सीएचसी तुलसीपुर के वरिष्ठ सहायक ज्ञानचंद को सौंपा गया है। केके मालवीय अब पोस्टमार्टम हाउस से संबंधित काम देखेंगे। अवकाश पर होने के कारण पंकज त्रिपाठी को अभी कोई काम नहीं सौंपा गया है।
लिपिकों के पटल परिवर्तन से राजनीतिक गलियारों में भी हलचल तेज हो गई है। कुछ रसूखदार लोग लिपिकों की पैरवी में जुट गए हैं। वहीं इस जांच से संबंधित संयुक्त जिला चिकित्सालय के लिपिक अजय श्रीवास्तव का पटल बदलने के बारे में सीएमएस डॉ. नानक सरन ने बताया कि कार्यालय में कोई अन्य लिपिक न होने के कारण अजय श्रीवास्तव का पटल अभी परिवर्तित किया जाना संभव नहीं है।