बलरामपुर। छह विभागों का समन्वय कुपोषण को काबू करने में नाकाम दिख रहा है। जिले के 13 हजार मासूमों पर कुपोषण का कहर है। जिले के 30 हजार मासूमों के सेहत भी कुपोषण की गिरफ्त में आ सकते हैं। जिले के 10 परियोजनाओं के 1882 आंगनबाड़ी केंद्रों पर छह माह से छह साल तक के 2.85 लाख नौनिहालों का पंजीकरण है।
चालू वित्त वर्ष के जून माह में भारत सरकार को भेजी गई रिपोर्ट में कुपोषण से पीड़ित बच्चों का खुलासा हुआ है। पोषाहार वितरण व अन्य जागरूकता कार्यक्रमों का भी जीरो से छह साल तक के बच्चों के कुपोषण को दूर करने में कोई बेहतर असर नहीं दिखा पा रहा है।
आईसीडीएस विभाग की तरफ से जून 2019 में भारत सरकार को कुपोषण से पीड़ित बच्चों की रिपोर्ट भेजी गई है। रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है कि जून 2019 में जिले के कुल 1882 आंगनबाड़ी केंद्रों पर छह साल तक के 2.85 लाख नौनिहालों का पंजीकरण हुआ है।
पंजीकरण के सापेक्ष छह माह से छह साल तक के 13,006 बच्चे अतिकुपोषित पाए गए हैं जबकि 29,997 बच्चों में कुपोषण की बीमारियों का लक्षण पाया गया है। बच्चों के कुपोषण को दूर भगाने के लिए हर माह विभाग की तरफ से तमाम गतिविधियां चलाई जा रही हैं।
आईसीडीएस, स्वास्थ्य, शिक्षा, मनरेगा, खाद्य रसद व पंचायतीराज विभाग की तरफ से जागरूकता कार्यक्रम चलाकर कुपोषित बच्चों के परिवारों को पोषाहार वितरण, इलाज की मुफ्त सुविधा, मुफ्त शिक्षा, मनरेगा योजना से परिवार के सदस्यों को गांवों में रोजगार, सस्ते रेट पर कोटे की दुकानों से गेहूं व चावल तथा 12 हजार रुपये का फ्री शौचालय निर्माण कराया जा रहा है।