पुलिस महकमा अभी तक विशाखा कमेटी गठित कर मामले की जांच करा रहा है, लेकिन बीते आठ महीने में बस खानापूर्ति ही की गई। कार्रवाई के नाम पर बस दीवान व आरोपी पुलिसकर्मियों को पुलिस लाइन भेजा गया है। होली के दूसरे दिन आरोपी पुलिसकर्मियों ने थाने में ही महिला आरक्षी को दौड़ा लिया था। वह बचने के लिए जब ट्रैक्टर पर चढ़ी, तो आरोपी उस पर भी चढ़ने लगे। चोट लगने के डर से सहमी हुई आरक्षी नीचे उतरी। इसके बाद जिस तरह की हरकत पुलिसकर्मियों ने की, उसे बयां करना सभ्य समाज के लिए सही नहीं है।
तब से न्याय के लिए संघर्ष कर रही आरक्षी अनुशासन के बंधन के कारण कुछ कह भी नहीं पा रही है। जांच की स्थिति बुरी है। रिपोर्ट कमेटी की फाइलों में ही उलझी हुई है। अब जाकर महिला आरक्षी की आवाज सीएम दरबार पहुंची तो कार्रवाई की उम्मीद बंधी है।
महिला अपराध में गंभीर कार्रवाई के निर्देश पहले भी दे चुके हैं सीएम
मुख्यमंत्री पूर्व में भी महिलाओं से जुड़े अपराध पर त्वरित और गंभीर कार्रवाई के निर्देश दे चुके हैं। उन्होंने मिशन शक्ति जैसी मुहिम का आगाज भी जिले के देवीपाटन मंदिर से वर्ष 2020 में ही किया था, जिसके बाद महिलाओं की सुरक्षा और पुख्ता हुई है। इसके लिए लगातार अभियान भी चल रहा है। पीड़ित महिला आरक्षी भी मिशन शक्ति मुहिम से जुड़ी रही है और घटना के दिन भी उसकी ड्यूटी कोतवाली देहात के महिला हेल्प डेस्क पर थी। छेड़खानी की शुरुआत आरोपी पुलिसकर्मियों ने हेल्प डेस्क से ही कर दी थी।
पीड़ित पर दबाव बनाने का भी प्रयास
छेड़खानी की शिकायत पर महिला आरक्षी की घेराबंदी की गई। आरोपी दीवान और पुलिसकर्मी एक साथ आरक्षी के घर रात में पहुंचे। फर्जी मामले में फंसाने तक की धमकी दी। इसके बाद भी महिला आरक्षी डरी नहीं। उसने हिम्मत जुटा कर महिला आयोग में भी शिकायत की। अब लाइनहाजिर होने के बाद से आरोपी तरह-तरह के हथकंडे अपना रहे हैं, कोशिश महिला आरक्षी की हिम्मत तोड़ने की है।