बलरामपुर/तुलसीपुर। चैत्र नवरात्र आज (रविवार) से शुरू हो रहा है। देवी मंदिरों को विशेष रूप से सजाया गया है। नगर के झारखंडी मंदिर के साथ पूरे जिले में नवरात्र को लेकर तैयारी की गई है। जिले में देवीपाटन मंदिर का विशेष महत्व है और यहां पूरे मंडल के ही नहीं देश व विदेश से लोग दर्शन करने आते हैं। प्रशासन ने भी मंदिर में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं।
नौ दिन चलने वाली विशेष पूजा के साथ तुलसीपुर स्थित देवीपाटन मंदिर में ऐतिहासिक मेले का भी शुभारंभ होगा। यहां देश के साथ नेपाल से भी बड़ी संख्या में दर्शन के लिए श्रद्धालु आते हैं। नवरात्र को देखते हुए दुकानों पर दिन भर लोग पूजा आदि सामग्री खरीदते रहे। नौ दिनों तक देवी मंदिरों में पूजन-अर्चन की धूम रहेगी। इसके साथ ही लोग व्रत भी रखेंगे। उतरौला के ज्वाला देवी मंदिर के साथ ही पूरे जिले की 28 देवी मंदिरों में पूजा-अर्चना होगी।
सीसीटी कैमरों के साथ ही निगरानी के कड़े इंतजाम
आस्था की प्रतीक प्रसिद्ध देवीपाटन मेला कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच शुरू हो रहा है। चैत्र नवरात्र से शुरू यह मेला एक माह तक चलता है। मंदिर व जिला प्रशासन की ओर से आयोजन की तैयारी पूरी कर ली गई है। प्रसाद, मिठाई समेत अन्य सामानों की दुकानें सज गई हैं। कहीं कोई गड़बड़ी न हो इसके लिए चप्पे-चप्पे पर सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं। दो जोन और 12 सेक्टरों में मेला क्षेत्र को बांट कर सुरक्षा के इंतजाम किए गए हैं। 100 से अधिक सीसीटीवी कैमरों से भी निगरानी रहेगी।
धार्मिक आयोजनों की रहेगी धूम
मां पाटेश्वरी धाम में चैत्र नवरात्र के दौरान माता रानी की पूजा-अर्चना के साथ ही तमाम धार्मिक संस्कार भी आयोजित होंगे। इस दौरान मंदिरों में देवी जागरण व भजन-कीर्तन जैसे कार्यक्रमों के साथ-साथ मुंडन, कर्ण छेदन एवं जनेऊ संस्कार भी कराए जाएंगे। इस दौरान अष्टमी व नवमी के दिन हवन व कन्या भोज के लिए भी खास तौर पर श्रद्धालुओं की भीड़ रहेगी।
भव्य और अद्भुत है मां पाटेश्वरी का धाम
तुलसीपुर के देवीपाटन में मां पाटेश्वरी देवी के दर्शनार्थ बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। यहां सूर्यकुंड में स्नान-ध्यान के बाद भक्तजनों के मां के दर्शन करने की प्रथा है। गर्भगृह में मां पाटेश्वरी की प्रतिमा स्थापित है। उनके सामने की पाताल चबूतरा है। गर्भगृह में ही अखंड ज्योति भी है। मंदिर परिसर में नेपाल के दांग जिले के योगी पीर रतननाथ का दरीचा है। यहीं पर अखंड धूनी है। यह धूनी महायोगी गोरक्षनाथ द्वारा जलाई गई थी, जो अनवरत जल रही है। परिसर में ब्रह्मालीन महंथ महेंद्रनाथ योगी की समाधि भी है। श्रद्धालु यहां सभी इष्ट देवी-देवताओं के दर्शन कर स्वयं की मनवांछित मनौती पूर्ण करते हैं।
भगवान शिव व श्रीराम से जुड़ी मां पाटेश्वरी की कथा
मां पाटेश्वरी देवी के मंदिर की महिला बड़ी निराली है। मां के दरबार में मत्था टेकने वालों की मनोकामना पूर्ण होती है। यही कारण है कि यहां पूरे साल भर भक्तों का आना होता है। चैत्र नवरात्र व शारदीय नवरात्र को भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु मां के दरबार में अपनी फरियाद लेकर पहुंचते हैं। देवीपाटन मंदिर महंत मिथलेश नाथ योगी कहते हैं सिद्ध शक्तिपीठों में देवीपाटन मंदिर एक है। इस स्थान पर शक्ति स्वरूपा सती का बायां कंधा सहित वस्त्र यहां गिरा था। देवी सती अपने पिता दक्ष प्रजापति के यज्ञ में अपने पति भगवान शंकर को आमंत्रित न किए जाने से क्रोधित होकर यज्ञ कुंड में कूद पड़ी थीं। इसके अलावा दूसरी मान्यता है कि जब सीता माता को भगवान श्रीराम द्वारा वन में छोड़ दिया गया था तो उन्होंने यहीं पर धरती मां से अपने गोद में शरण देने की प्रार्थना की थी और इसी स्थान पर धरती फट गई थी। उसमें से सिंहासन निकला था और वह उसमें समां गई थी। तब से उनका नाम पतालेश्वरी देवी पड़ गया जो कालांतर में पाटेश्वरी देवी कहा जाने लगा। तभी से यह सिद्ध शक्तिपीठ कहलाने लगा।
सभी तैयारियां पूरी
चैत्र नवरात्र के साथ मेला की तैयारी पूरी कर ली गई है। श्रद्धालुओं को कोई परेशानी न हो, इसके लिए प्रशासन के साथ बैठक कर आवश्यक तैयारी की गई है। -योगी मिथलेश नाथ, महंत, देवीपाटन मंदिर
मेला स्पेशल ट्रेन के साथ बसों का होगा संचालन
देवीपाटन मेला को देखते हुए रेलवे एक जोड़ी मेला स्पेशल ट्रेन का संचालन भी शुरू कर रहा है। यह ट्रेन रविवार से संचालित होगी और पूरे महीने तक चलेगी। इससे दिल्ली से तुलसीपुर तक की यात्रा की सुविधा लोगों को मिलेगी। इसके अलावा देवीपाटन मंडल के चारों जिलों और लखनऊ से 145 बसों को संचालन होगा, जिससे श्रद्धालुओं के आवागमन में दिक्कत न हो। मेला क्षेत्र में एक आस्थायी बस अड्डा भी बनाया गया है।
डीएम और एसपी ने किया निरीक्षण,
जिलाधिकारी पवन अग्रवाल और पुलिस अधीक्षक विकास कुमार ने मेले क्षेत्र का शनिवार को भ्रमण किया। उन्होंने तैयारियों की जानकारी ली। मेला प्रभारी एसडीएम तुलसीपुर को निर्देश दिया कि श्रद्धालुओं की सुविधाओं को ध्यान में रखा जाए, उन्हें किसी तरह की दिक्कत न हो। रूट डायवर्जन को सख्ती से लागू करने पर जोर दिया। मेले ड्यूटी के अधिकारियों और कर्मचारियों को कड़े निर्देश दिए।