बलरामपुर तहसील के ग्राम बलरामपुर देहात में गाटा संख्या 1655 व 1671 की बहुमूल्य सरकारी जमीन निजी खाता दिखाकर हड़पने की कोशिश की जा रही थी। डीएम ने जांच कराई तो खुलासा हुआ कि यह साजिश 1982-83 में ही चकबंदी लेखपाल, चकबंदीकर्ता और सहायक चकबंदी अधिकारियों की मिलीभगत से रची गई थी। चकबंदी प्रक्रिया के दौरान तत्कालीन चकबंदी अधिकारियों ने साजिशन सरकारी भूमि को मोहम्मद शाह के नाम दर्ज करवा दिया। जमीन पर फर्जी वसीयत और गलत आदेश के जरिए बाद में भूमिधरी का फर्जी हक बना दिया गया।
वर्ष 2017 में तत्कालीन चकबंदी अधिकारी कैलाश चंद्र भारती ने एक आदेश पारित कर उमानाथ, रघुराज, विष्णु प्रताप, महेंद्र पाल को भूमि का मालिक दिखा दिया। यही नहीं, तत्कालीन नायब तहसीलदार और तहसीलदार स्तर के अधिकारियों ने भी जांच की जगह सीधे नामांतरण कर दिया। इसके साथ ही मन्नरमाला नाम की महिला ने फर्जी वसीयत के आधार पर न्यायालय से आदेश हासिल कर खुद को भूमिधर घोषित करा लिया।
उसी जमीन को बृजराज सिंह, संध्या सिंह समेत चार लोगों को बेच दिया गया। इसी तरह अजीज अहमद खां और रशीद अहमद खां के वारिसों ने भी अदालत से फर्जी आदेश हासिल कर जमीन पर हक जमा लिया। यह भूमि बाद में लखनऊ निवासी रमेश गुप्ता को एक रुपये में दान में दे दी गई।
इनपर दर्ज हुआ मुकदमा
चकबंदी अधिकारी सदर बलरामपुर मनोज श्रीवास्तव की तहरीर पर 25 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। इनमें मोहम्मद अहमद, तत्कालीन लेखपाल, तत्कालीन चकबंदीकर्ता, सहायक चकबंदी अधिकारी निवासीगण अज्ञात के साथ ही कोतवाली देहात बंजारी के उमानाथ, विष्णु, राकेश कुमार, रघुराज, महेंद्र पाल, मन्नरमाला निवासी कालीथान, बृजराज सिंह, राकेश सिंह, संध्या सिंह, विभा सिंह, निवासीगण कालीथान, रमेश कुमार गुप्त निवासी लखनऊ मध्य, अजीज अहमद खां, रशीद अहमद खां, मुजीब अहमद, मुईन अहमद खां, सुहेल अहमद खां, शुएब अहमद खां, शाकारा खान, रिजवान अहमद, रिहान अहमद, इमरान अहमद निवासीगण अज्ञात शामिल हैं। प्रभारी निरीक्षक सुधीर सिंह ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है।
दोषियों पर होगी कठोर कार्रवाई
सरकारी जमीन हड़पने के मामले में कठोर कार्रवाई की जा रही है। एफआईआर दर्ज कराई गई है। विभागीय कार्रवाई भी की जा रही है। जमीन को सरकारी खाते में दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
-पवन अग्रवाल, जिलाधिकारी बलरामपुर