तुलसीपुर (बलरामपुर)। जिले के हार्ड एरिया में फसलों की सिंचाई के लिए नहर की खोदाई का काम 44 वर्ष बाद भी पूरा नहीं हो सका है। इससे सैकड़ों हेक्टेअर फसल की सिंचाई में किसानों को परेशानी होती है। वहीं समय से सिंचाई नहीं होने से फसल उत्पादन भी प्रभावित होता है।
जिले के हरैया सतघरवा, तुलसीपुर, गैसड़ी व पचपेड़वा ब्लॉक को हार्ड एरिया माना जाता है। यहां जलस्तर काफी नीचे होने से गर्मी के दिनों में तालाब व अन्य जलस्रोत सूख जाते हैं। नलकूप भी काम नहीं करते हैं। ऐसे में हार्ड एरिया में फसलों की सिंचाई के लिए वर्ष 1976 में राप्ती नहर परियोजना का शुभारंभ किया गया था। नहर को बहराइच में स्थित राप्ती से निकालकर श्रावस्ती व बलरामपुर होते हुए सिद्धार्थनगर की बानगंगा नदी में मिलाने की योजना तैयार की गई थी।
वर्ष 2017 में 125 किलोमीटर लंबी नहर का कार्य पूरा होना था, लेकिन जमीन अधिग्रहण में समस्या एवं बजट के अभाव के कारण राप्ती नहर परियोजना का कार्य बहुत ही धीमी गति से कराया गया। इससे परियोजना का कार्य 44 वर्ष बाद भी पूरा नहीं हो पाया है। इसके कारण हरैया सतघरवा, तुलसीपुर, गैसड़ी व पचपेड़वा ब्लॉक के किसान फसल की सिंचाई के लिए बारिश पर ही निर्भर हैं।
क्षेत्र के प्रगतिशील किसान उमाशंकर सिंह, गोपाल सिंह, मो. रउफ, शफीक अख्तर, नीलेंद्र सिंह, धर्मेंद्र व हरिशंकर सिंह आदि का कहना है कि असिंचित क्षेत्र होने के कारण यहां के किसान अपनी फसल की सिंचाई के लिए बारिश का इंतजार करते हैं। नहर की खोदाई का काम शुरू होने से किसानों में बेहतर सिंचाई सुविधा मिलने की उम्मीद जगी थी, लेकिन 44 साल बाद भी उनका सपना पूरा नहीं हो पाया है।
तेजी से कराया जा रहा कार्य
उत्तर प्रदेश शासन के निर्देश पर राप्ती नहर परियोजना का कार्य तेजी से कराया जा रहा है। 90 प्रतिशत कार्य पूरा किया जा चुका है। शेष कार्य शीघ्र पूरा कराकर मार्च तक नहर का संचालन शुरू करा दिया जाएगा।
- संतोष कुमार, अधिशासी अभियंता