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Balrampur News: चुनावी माहौल में बजट का तड़का, पंचायतों को 20 करोड़ की सौगात

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बलरामपुर में ​स्थित विकास भवन कार्यालय।-संवाद
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बलरामपुर। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की तैयारियों के बीच शासन ने पंचायतों के लिए खजाना खोल दिया है। जिले को 20 करोड़ 39 लाख 38 हजार 890 रुपये का बजट जारी हुआ है। चुनावी माहौल में आई इस सौगात से पंचायत प्रतिनिधियों के चेहरे खिल गए हैं। प्रधानों से लेकर ब्लाॅक प्रमुखों और जिला पंचायत अध्यक्ष तक बजट आवंटन को लेकर गदगद हैं। चुनाव से पहले यह वित्तीय तड़का न सिर्फ विकास की उम्मीदें बढ़ा रहा है, बल्कि सियासी रंग को भी और गाढ़ा कर रहा है।
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शासन से जारी बजट में अकेले जिला पंचायत को तीन करोड़ चार लाख 73 हजार 906 रुपये मिले हैं। वहीं, जिले के नौ ब्लॉकों को तीन करोड़ पांच लाख 76 हजार 952 रुपये का आवंटन किया गया है। सबसे बड़ा हिस्सा 793 ग्राम पंचायतों को मिला है, जिन्हें कुल 14 करोड़ 28 लाख 88 हजार 32 रुपये का बजट बांटा गया है। पंचायतीराज विभाग ने यह बजट 15वें वित्त आयोग के बुनियादी अनुदान मद से जारी किया है। आबादी के हिसाब से पंचायतों और ब्लॉकों को इसका हिस्सा दिया जाएगा। जिला पंचायत राज अधिकारी श्रेया उपाध्याय ने बताया कि जिलाधिकारी की अध्यक्षता वाली समिति की अनुमति के बाद वित्तीय नियमों के तहत पंचायतों को धनराशि आवंटित होगी। बजट का खर्च केवल विकास कार्यों पर किया जाएगा और विभागीय अधिकारी इसकी निगरानी करेंगे।
चुनाव से पहले ‘विकास का चारा’
राजनीतिक हलकों में बजट जारी होने को चुनावी रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। ग्रामीण इलाकों में सियासत का बड़ा आधार पंचायतें ही होती हैं। ऐसे में चुनाव से पहले बजट का जारी होना राजनीतिक रंग को और गाढ़ा करेगा। विकास कार्यों की रफ्तार तेज कर के मतदाताओं को सीधे साधने की कोशिश मानी जा रही है। गांव-गांव में बजट की चर्चा जोरों पर है। प्रधानों और पंचायत प्रतिनिधियों का कहना है कि लंबे समय से रुके हुए विकास कार्य अब रफ्तार पकड़ेंगे।
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ब्लॉकों से 50 लाख तो पंचायतों को पांच लाख तक मिलेंगे
15वें वित्त आयोग से मिले बजट का बंटवारा भले ही आबादी के हिसाब से आवंटित किया जाना है, लेकिन पंचायतीराज विभाग के जानकार सेवानिवृत्त एडीओ पंचायत राम प्रताप शुक्ल कहते हैं कि ब्लॉकों को 50 लाख रुपये और पंचायतों को अधिकतम पांच लाख तक का बजट मिलना तय है। उन्होंने यह भी कहा कि इसके अलावा स्वच्छता, 14 वें वित्त, पंचम वित्त और मनरेगा का बजट भी पंचायतों के पास होता है। आपस में बजट का कनवर्जन करके महत्वपूर्ण कार्य हो सकते हैं।
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