हरैया सतघरवा। ग्राम हिंडुलीकला के काली माता मंदिर परिसर में श्रीराम महायज्ञ एवं संगीतमय रामकथा के सातवें दिन वनगमन प्रसंग सुनाया गया। प्रवाचक ने बताया कि भरत भगवान की चरण पादुका लेकर अयोध्या वापस लौटे और उसे सिंहासन पर रखकर राजपाट का कार्य देखने लगे। इस प्रसंग को सुनकर श्रद्धालु भाव विभोर हो गए।
प्रवाचक आचार्य पंडित कृपा शंकर ने कहा कि नंदी गांव में कुटी बनाकर भरत कुटिया में निवास कर भगवान राम की पादुका का पूजन करते हुए भजन-कीर्तन में लीन हो गए। चित्रकूट से होकर वन में प्रवेश करने के बाद इंद्र के पुत्र जयंत के सीता माता के चरण में चोंच से प्रहार करने पर भगवान ने उसे दंड दिया। प्रवाचक ने सीताहरण, रावण-जटायु युद्ध व लंका दहन के प्रसंग सुनाए। बताया कि माता सीता को लंका की अशोक वाटिका में रखा गया। भगवान राम की मुद्रिका लेकर हनुमान जी ने लंका में प्रवेश किया ओर मुद्रिका सीता को देकर अपना परिचय बताया।
माता की आज्ञा से हनुमान जी फल खाने लगे तो सैनिक उन्हें पकड़कर रावण के दरबार में ले गए। जहां पूंछ में आग लगने के बाद हनुमान ने लंका जला डाली। इस अवसर परउमेश दास त्यागी, रामजी मिश्र, संजय कुमार, रमेश कुमार, मुंशीलाल, अक्षय कुमार अजय कुमार, रमेश पासवान राजकुमार मोदी, दीनानाथ समेत बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।