जरवा। प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी वन डिस्ट्रिक्ट-वन वेटलैंड योजना के तहत जिले के भगवानपुर जलाशय को शामिल किए जाने की संभावना है। यदि यह जलाशय योजना में चयनित होता है, तो वर्षों से उपेक्षा, अव्यवस्था और खतरे का सामना कर रहे इस महत्वपूर्ण जलस्रोत को संजीवनी मिलेगी।
ग्राम पंचायत भगवानपुर के बाहर स्थित भगवानपुर जलाशय से चार प्रमुख नहरें निकलती हैं, जिनके माध्यम से भगवानपुर, दानपुर, पिपरी, लौकखुर्द, पिपरा दुर्गानगर, प्रतापुर, छिपिया, सुखरामपुर, पुरुषोत्तमपुर, संवल समेत 11 गांवों की सिंचाई होती है। इसके अतिरिक्त अलग-अलग शाखा नहरों के जरिये कुल 15 से अधिक गांवों की खेती इसी जलाशय पर निर्भर हैं। जलाशय को योजना में शामिल कराने की मुहिम शुरू करने वाले बलरामपुर फर्स्ट के संयोजन सर्वेश सिंह ने कहा कि इस जलाशय से जैव विविधिता के विकास होने के साथ ही स्थानीय किसानों को भी लाभ होगा। ग्रामीण रामकिशुन ने बताया कि जलाशय और नहरों की वर्षों से नियमित सफाई नहीं हो सकी है। जगह-जगह क्षतिग्रस्त नहरें, पक्के रास्तों का अभाव और जर्जर पुल किसानों और ग्रामीणों के लिए गंभीर खतरा बने हुए हैं। अब इसके संवरने से पर्यटन विकास के साथ ही किसानों को सिंचाई की सुविधा भी मिल सकेगी।
ग्रामीणों का कहना है कि सिंचाई के लिए पानी की जरूरत पड़ने पर उन्हें 20 किलोमीटर दूर तुलसीपुर या 50 किलोमीटर दूर बलरामपुर तक शिकायत लेकर जाना पड़ता है। यदि भगवानपुर जलाशय को वेटलैंड का दर्जा मिलता है, तो स्थानीय स्तर पर समस्याओं का समाधान संभव हो सकेगा।
नई योजना से युवाओं और किसानों को उम्मीदें
योजना के तहत जिले के एक प्रमुख वेटलैंड का चयन कर उसका संरक्षण, पुनर्जीवन और विकास किया जाएगा। योजना का उद्देश्य जल संरक्षण, जैव विविधता की रक्षा, ईको-टूरिज्म को बढ़ावा और स्थानीय लोगों के लिए आजीविका के अवसर पैदा करना है। चयनित वेटलैंड में जलस्रोतों की सफाई, सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था, जलचर और पक्षियों के संरक्षण, अतिक्रमण हटाने तथा ईको-टूरिज्म से जुड़े विकास कार्य किए जाएंगे। अब सभी की निगाहें शासन के निर्णय पर टिकी हैं। इससे युवाओं और किसानों को खासी उम्मीदें हैं।
सर्वे के बाद तैयार किया जाएगा प्रस्ताव
शासन ने वेटलैंड विकास की पहल की है। इसके लिए निर्देश मिले हैं। जिले के वेटलैंड का सर्वे किया जाएगा। इसके बाद शासन को प्रस्ताव भेजा जाना है, इसकी तैयारी की जा रही है।
- गौरव गर्ग, जिला प्रभागीय वनाधिकारी