बलरामपुर। देशभर में दालों की बढ़ती मांग के बीच बलरामपुर की मसूर ने अपनी खास पहचान बनाई है। छोटे दाने वाली यह दाल स्वाद और पौष्टिकता में अन्य मसूरों से बेहतर मानी जाती है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में इसकी खास डिमांड है। फिलहाल जिले के आठ कारोबारी हर महीने करीब 70 हजार क्विंटल दाल की आपूर्ति कर रहे हैं।
एक जिला, एक उत्पाद योजना के तहत मसूर दाल को जिले की प्रमुख नकदी फसल घोषित किया गया है। सरकार द्वारा उत्पादन बढ़ाने से लेकर प्रसंस्करण यूनिट लगाने वालों को प्रशिक्षण, ऋण और अनुदान दिया जा रहा है। अभी जिले में मसूर की खेती करीब 4600 हेक्टेयर में होती है और औसत उत्पादन 18 से 20 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक पहुंच गया है। 18 जुलाई को उद्योग कार्यालय (उतरौला रोड धर्मपुर) में युवाओं के लिए साक्षात्कार आयोजित किया जाएगा। उद्योग विभाग 200 नए युवाओं को दाल के क्षेत्र में दक्ष बनाकर स्वरोजगार के लिए तैयार करेगा।
35 करोड़ का ऋण, 5 करोड़ का अनुदान
अब तक जिले में दाल उद्योग से जुड़े कारोबारियों को 35 करोड़ रुपये का ऋण और 5 करोड़ रुपये का अनुदान मिल चुका है। नगर के उद्यमी श्याम सुंदर केसरीवानी ने बताया कि उन्हें उद्योग विभाग से 20 लाख रुपये का अनुदान मिला। जिससे उन्होंने दाल प्रोसेसिंग मशीन लगाई है और उनका कारोबार लगातार बढ़ रहा है।