बलरामपुर। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में रसायन नहीं है। जिससे कंप्लीट ब्लड काउंट (सीबीसी) की जांच नहीं हो पा रही है। जबकि सीएचसी के रोगी कल्याण समिति में इसके लिए भरपूर बजट है। इसका खामियाजा मरीजों का उठाना पड़ रहा है। उन्हें निजी पैथालॉजी में महंगी जांचें करानी पड़ रहीं हैं।
पैथालॉजी केंद्र प्रतिमाह 50 लाख रुपये का कारोबार कर रहे हैं। ऐसे में मरीजों को परेशानी हो रही है।
जिले में नौ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र संचालित हैं। इन केंद्रों पर रसायन के अभाव में सीबीसी की जांच नहीं हो पा रही है। अस्पताल आने वाले मरीजों को हीमोग्लोबिन, टीएलसी-डीएलसी व प्लेटलेट समेत अन्य जांचों के लिए भटकना पड़ता है। बुधवार को सीएचसी उतरौला में इलाज कराने आए राजेश, राशिद, फरजाना व पप्पू ने बताया कि लैब में जांच नहीं हुई। निजी केंद्र पर जांच के लिए 350 रुपये ले लिए गए।
प्रति सीएचसी मिलती है राशि
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत रोगी कल्याण समिति में प्रति सीएचसी ढाई लाख रुपये दिया जाता है। बजट को अधीक्षक मरीजों के लिए पेयजल, बैठने की व्यवस्था, भवन की साफ-सफाई व आवश्यक वस्तुओं की खरीद पर खर्च कर सकते हैं। इसके बाद भी रसायन की खरीद नहीं की गई, जिससे मरीजों को परेशानी हो रही है।
संचालित हैं 45 निजी पैथालॉजी
जिले में 45 से अधिक पैथालॉजी केंद्र संचालित हैं। इन केंद्रों पर सीबीसी जांच के लिए 300 से 350 रुपये तक लिए जाते हैं। अनुमान के मुताबिक आंकड़ों के अनुसार निजी पैथालॉजी केंद्र प्रतिमाह करीब 50 लाख रुपये तक का कारोबार करते हैं।
सीएचसी पर रसायन उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है। अधीक्षकों ने आरकेएस बजट से अब तक रसायन क्यों नहीं खरीदा, इसको लेकर उसने स्पष्टीकरण मांगा जाएगा। पत्र जारी किया जाएगा। डॉ. सुशील कुमार, सीएमओ बलरामपुर