उतरौला। बाबू, आज साहेब अदालत पर बैठेंगे कि नाहीं... बैरिया सुर्जनपुर से करीब 30 किलोमीटर का सफर तय कर तहसील पहुंचे फरियादी आज्ञाराम का यह सवाल बृहस्पतिवार को तहसील परिसर की हकीकत बयां कर रहा था। ऑनलाइन नामांतरण (दाखिल-खारिज) प्रक्रिया के विरोध में अधिवक्ताओं के आठवें दिन भी जारी कार्य बहिष्कार के कारण उन्हें बिना सुनवाई के मायूस होकर लौटना पड़ा।
अधिवक्ता संघ के न्यायिक कार्य और रजिस्ट्री कार्यालय में संपत्ति पंजीकरण के बहिष्कार से तहसील न्यायालय में 281 मुकदमों की सुनवाई प्रभावित रही। शाहपुर इटई से एहसान खान, बलरामपुर से हीरा सिंह, रेहरा बाजार से कृष्ण कुमार, गौर से मोहम्मद अली और सादुल्लाहनगर से परमानंद समेत अनेक वादकारी अपने-अपने मुकदमों की पैरवी के लिए पहुंचे, लेकिन सुनवाई न होने पर सभी को नई तारीख लेकर लौटना पड़ा। इससे लोगों का समय और धन दोनों व्यर्थ हो रहे हैं। लगातार आठ दिनों से चल रहे बहिष्कार के कारण न्यायालय परिसर में सामान्य गतिविधियां ठप हैं। वहीं रजिस्ट्री कार्यालय में भी संपत्ति पंजीकरण प्रभावित होने से जमीन-जायदाद के बैनामा कराने आए लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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सकारात्मक निर्णय होने तक जारी रहेगा आंदोलन
अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष प्रह्लाद यादव ने कहा कि ऑनलाइन नामांतरण प्रक्रिया के विरोध में अधिवक्ता पूरी तरह एकजुट हैं। यह केवल अधिवक्ताओं का नहीं, बल्कि आम जनता के हितों से जुड़ा मुद्दा है। मांगों पर सकारात्मक निर्णय होने तक आंदोलन जारी रहेगा। महामंत्री रविशंकर मिश्र ने कहा कि यदि शासन-प्रशासन ने मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा तथा आवश्यकता पड़ने पर अधिवक्ता सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन भी करेंगे।