जरवा। गैसड़ी क्षेत्र के जरवा में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति बेहद चिंताजनक हो गई है। करोड़ों रुपये खर्च कर अस्पतालों की इमारतें तो बना दी गईं, लेकिन दवाओं और स्टाफ के अभाव में अस्पताल मरीजों को समुचित इलाज देने में असमर्थ हैं। करीब 80 हजार की आबादी बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए परेशान है।
क्षेत्र में राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय जरवा, तुलसीपुर, बसंतपुर, बरगदवा कला, नेवलगंज, गैसड़ी और पचपेड़वा के भगवानपुर समेत लगभग 30 अस्पताल संचालित हैं। अधिकांश अस्पतालों में फार्मासिस्ट, वार्ड बॉय और सहायक स्टाफ के पद लंबे समय से खाली पड़े हैं। बसंतपुर, रूपसिंहडीह, हरिहरगंज और नेवलगंज अस्पतालों में डॉक्टर तैनात नहीं हैं, जबकि कई अस्पताल फार्मासिस्ट के सहारे चल रहे हैं।
मुख्य दवाओं की आपूर्ति बाधित
प्रभारी राजकीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी चिकित्सा अधिकारी डॉ. संजय कनौजिया ने बताया कि करीब दो वर्षों से केंद्र सरकार की मुख्य दवाओं की आपूर्ति बाधित है। राज्य सरकार से मिलने वाली सीमित दवाओं के सहारे इलाज चल रहा है, जबकि लगभग 40 प्रतिशत आवश्यक दवाएं उपलब्ध नहीं हैं। इससे मरीजों को बाजार से महंगी दवाएं खरीदनी पड़ रही है।
छोटी बीमारियों के लिए भी जिला मुख्यालय तक सफर
स्थानीय निवासी घनश्याम यादव, सगीर खान, राजू, हरीश, संतोष, लाले, रामाचार्य, अरुण, जनकराम और दीपक ने बताया कि अस्पतालों में दवा और स्टाफ की कमी से मरीजों को छोटी बीमारियों के लिए भी 60 से 80 किलोमीटर दूर जिला अस्पताल जाना पड़ रहा है। उन्होंने रिक्त पदों पर शीघ्र भर्ती और दवाओं की नियमित आपूर्ति की मांग की है