बलरामपुर। मदरसों की जांच में जुटी एटीएस ने शुक्रवार को फोन पर अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के अधिकारियों से बात कर जानकारी ली। जिले में इस समय 25 सहायता प्राप्त के साथ कुल 462 मान्यता प्राप्त मदरसे हैं। 233 मदरसे बिना मान्यता के संचालित हो रहे हैं।
सुरक्षा एजेंसियों से मिले इनपुट के आधार पर वर्ष 2022-23 में एसडीएम ने मदरसों का स्थलीय सत्यापन किया था। उस वक्त मदरसे के संचालन का आर्थिक स्रोत पता लगाने की कोशिश की गई थी। तब अधिकांश संचालकों ने चंदे की बात कहकर पीछा छुड़ा लिया था। अब जांच एटीएस को सौंपी गई है।
एटीएस ने गोंडा में जांच शुरू करने के साथ ही स्थानीय अफसरों से भी जानकारी जुटाई है। इसके बाद अल्पसंख्यक कल्याण विभाग मदरसों की फाइल तैयार करने में जुट गया है। जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी यशवंत मौर्य ने बताया कि जांच एजेंसी के अधिकारियों से फोन पर बात हुई है। जब भी वह आएंगे, उन्हें पूरी जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी।
मदरसा आधुनिकीकरण शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष ओवैस मोनिस का कहना है कि मदरसों को अमान्य कहना गलत है। वर्ष 2016 से मदरसों की मान्यता ही बंद है। ऐसे में अगर कोई मदरसा बिना मान्यता के चल रहा है तो वह गलत नहीं है। अगर सरकार मान्यता देती, इसके बाद कोई मदरसा संचालक मान्यता न लेता तब वह गलत था। मदरसों की व्यवस्था को बेहतर करने की बात तो सरकार कर रही है। लेकिन मदरसों में तैनात आधुनिक शिक्षकों को वर्ष 2022 से वेतन नहीं मिल रहा है।