बलरामपुर। मशहूर शायर अली सरदार जाफरी की रचनाओं में हर मौजू पढ़ने व सुनने को मिलता था। शायद यही वजह है कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी उनकी रचनाओं के मुरीद थे। उनके आखिरी संकलन सरहद को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी अपने साथ रखते थे। 20-21 फरवरी 1999 को ऐतिहासिक लाहौर शिखर सम्मेलन के दौरान अटल बिहारी वाजपेयी ने पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को राष्ट्रीय उपहार के रूप में सरहद पुस्तक भेंट की थी।
बलरामपुर शहर के बलुहा मोहल्ला निवासी अली सरदार जाफरी का जन्म 29 नंवबर 1913 को हुआ था। उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से तालीम हासिल की। सरदार जाफरी की संगत अपने समय के उम्दा शायरों के साथ होती थी, इसलिए शायरी, गीत-गजल उन्हें संगत में मिले और उसी माहौल में वे ढलते चले गए। उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के जाकिर हुसैन कॉलेज दाखिला लिया और स्नातक की उपाधि प्राप्त की। दिल्ली यूनिवर्सिटी के बाद पोस्ट-ग्रेजुएशन के लिए उन्होंने लखनऊ यूनिवर्सिटी में दाखिला लिया। वैसे 12 से 14 साल की उम्र में ही उन्होंने शायरी शुरू की थी। (संवाद)
यहां से शुरू हुई थी साहित्यिक पारी
अली सरदार जाफरी ने 1938 में मंजिल नामक लघु कहानियों के अपने पहले संग्रह के प्रकाशन के साथ अपने साहित्यिक कॅरिअर की शुरुआत की। उनका पहला कविता संग्रह परवाज प्रकाशित हुआ था। बाद में वह प्रगतिशील लेखक आंदोलन को समर्पित एक साहित्यिक पत्रिका नया अदब के सह-संपादक बने। अली सरदार जाफरी के लेखन का दौर अंग्रेजी सियासत का दौर था। उन्होंने देशप्रेम को अपनी रचनाओं का आधार बनाया। लिखा कि लहू पुकारता है, हर तरफ पुकारता है.. को लोगों ने खूब पसंद किया। अली सरदार जाफरी ने सामाजिक, राजनीतिक और साहित्यिक आंदोलनों में बढ़-चढ़कर भाग लिया। ऐसे में उन्हें तमाम परेशानियां भुगतनी पड़ीं, लेकिन वे किसी डर या ताकत के आगे झुकें नहीं।
फिल्मों के लिए भी लिखे गीत
समय के साथ-साथ अली सरदार जाफरी ने फिल्मों के लिए भी गीत लिखे। वे गीतकार के रूप में स्थापित होने लगे थे। धरती के लाल और परदेसी फिल्मों के लिए गीत लिखे। अली सरदार जाफरी के कविता संग्रह प्रकाशित हुए, जिनमें परवाज, जम्हूर, नई दुनिया को सलाम, खून की लकीर, अम्मन का सितारा, एशिया जाग उठा, पत्थर की दीवार, एक ख्वाब और, पैरहन-ए-शरर, लहू पुकारता है और मेरा सफर शामिल हैं। इनके बाद उनका आखिरी संकलन सरहद काफी चर्चित रहा।अली सरदार जाफरी ने भारत-पाकिस्तान दोस्ती के नाम एक नज्म भी लिखी थी- गुफ्तगू बंद न हो, बात से बात चले ने काफी सुर्खियां बटोरीं। अली सरदार जाफरी को उनकी साहित्यिक सेवाओं के लिए ज्ञानपीठ पुरस्कार के अलावा साहित्य अकादमी पुरस्कार सहित अन्य सम्मान मिले। एक अगस्त 2000 को ब्रेन ट्यूमर के कारण उनका देहांत हो गया। उनके भतीजे जाफर मेहदी जाफरी का कहना है कि उन्हें जितना महत्व मिलना चाहिए था, उतना नहीं मिल पाया। उनकी रचनाओं को सहेजने की आवश्यकता है।