हरैया सतघरवा (बलरामपुर)। पहाड़ी नालों की कटान से उदईपुर खैरहनिया गांव में कई घरों के अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा है। गांव के किनारे स्थित पहाड़ी नालों के तट पर कटान रोधी कार्य न कराए जाने से नाराज ग्रामीणों ने बुधवार को प्रदर्शन किया। विभागीय अधिकारियों के खिलाफ नारेबाजी करते हुए ग्रामीणों ने घर व कृषि योग्य भूमि को पहाड़ी नालों की कटान से बचाने के लिए प्रभावी कार्य कराए जाने की मांग जिलाधिकारी से की है।
नाले के किनारे प्रदर्शन करते हुए काशीराम, झाबू, छेदीराम, मुने, हृदयराम, हिदायतउल्ला, बाबूराम, रेखा, कृपाराम, शहजहां, बच्चाराम, फूलन देवी, हरीराम, पूनम व सूरा आदि ने कहा कि पहाड़ी पर बारिश होने से नालों में तेज बहाव के साथ बाढ़ आ जाती है, जो अपने साथ घर व जमीन को काटकर बहा ले जाती है।
उदईपुर खैरहनिया गांव नेपाल के पहाड़ों और जंगलों से होकर निकलने वाले धोबैनिया, खैरहनिया व जमधरा पहाड़ी नाले के तट पर स्थित है। हर साल बारिश के मौसम में बाढ़ आती है और गांव की दर्जनों एकड़ कृषि योग्य भूमि कटकर नाले में समाहित हो जाती है। इसके बावजूद शासन-प्रशासन की तरफ से कटान रोकने के लिए इन नालों के तट पर कटान रोधी कार्य के नाम पर बंबू कैरेट का कार्य कराया गया है। जो कटान रोकने में कतई प्रभावी नहीं होगा। गांव की आबादी अब नाले से मात्र 20 मीटर ही बची है। इस वर्ष यदि नाले में तेज बहाव के साथ बाढ़ आई तो करीब 60 लोगों का घर नाले में समाहित हो जाएगा। पहाड़ी नालों में तेजी से हो रही कटान से ग्रामीण भयभीत हैं। इन लोगों का यह भी कहना है कि यदि घर कट गया तो हम लोगों के पास घर बनाने के लिए कोई दूसरी जमीन नहीं है।
ग्रामीणों ने जिलाधिकारी, क्षेत्रीय सांसद, विधायक व मुख्यमंत्री को प्रार्थना पत्र प्रेषित कर पहाड़ी नालों की कटान को रोकने के लिए प्रभावी कार्रवाई किए जाने की मांग की है।