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Balrampur News: सीमांत में हरियाली के साथ रोजगार की भी नई उम्मीद

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बलरामपुर के जरवा में अमर उजाला अखबार पढ़कर चर्चा करते लोग ।-संवाद
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हरैया सतघरवा/जरवा। भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र में पुराने रोजगार और बाजार की यादें अब नई उम्मीदों के साथ लौटने लगी हैं। क्षेत्रवासियों का कहना है कि सीमांत में हरियाली के साथ रोजगार की वापसी से स्थानीय अर्थव्यवस्था में सुधार और युवाओं में नई ऊर्जा का संचार होगा। तराई के समग्र विकास के लिए भंसार सुविधा बहाली बेहद जरूरी है।
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भड़सहिया बाजार से नेपाल के खंगरा नाका तक जाने वाला 10 किलोमीटर लंबा जंगल मार्ग आज भी लोगों के रोजमर्रा के जीवन का हिस्सा है। कटकुइयां निवासी मोहम्मद बहराइची ने बताया कि हमारे पूर्वज पहले भारत में रहते थे। रोजी-रोटी के सिलसिले से नेपाल चले गए और अब हम वापस कटकुइयां में बस चुके हैं। हम नाई बिरादरी से हैं और नेपाल में सैलून चलाते थे। यदि भंसार सुविधा मिल जाए तो युवाओं के लिए स्वरोजगार के द्वार खुल जाएंगे। इससे स्थानीय लोग आत्मनिर्भर बन सकेंगे।
शब्बीर ने कहा कि सीमा क्षेत्र में भंसार सुविधा के बाद व्यवसाय और रोजी-रोटी दोनों में सुधार आएगा। नेपाल और भारत के लोगों की आवाजाही आसान होगी। रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। जरवा के युवा रामजीवन यादव ने कहा कि अब सीमा क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत है। ऐसे में भंसार सुविधा की संभावना है। इससे व्यापार और रोजगार के नए अवसर मिलेंगे। इससे हमें न केवल रोजगार मिलेगा, बल्कि गांव की अर्थव्यवस्था भी सुधरेगी।
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दत्तापुर की गीता देवी कहती हैं कि हमें उम्मीद है कि जंगल संरक्षित रहेंगे और प्राकृतिक संसाधनों का सही उपयोग किया जाएगा। इससे गांव की हरियाली बनी रहेगी। पर्यावरण भी सुरक्षित रहेगा। वन्यजीव विशेषज्ञ शैलेंद्र नाथ मिश्र का कहना है कि सीमांत इलाकों में रोजगार, व्यापार और पर्यावरण संरक्षण के संतुलन से स्थानीय अर्थव्यवस्था और युवाओं के लिए स्थायी विकास संभव है। भंसार सुविधा, स्वरोजगार और हरे-भरे जंगल की वापसी से सीमांत में फिर से तरक्की के द्वार खुल सकते हैं।
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हरियाली और समृद्धि की चर्चा



-जरवा क्षेत्र के लोग भी सीमांत व्यापार और रोजगार के अवसरों को लेकर उत्साहित हैं। दत्तापुर के मुन्ना सिंह बताते हैं कि पत्थर, बालू, मोरंग, कोयला और गिट्टी का व्यापार जब ठप हुआ तो हमारी आय प्रभावित हुई। वर्ष 2000 में सोहेलवा वन्यजीव प्रभाग बनने के बाद जंगल संरक्षित हो गया और अधिकांश व्यवसाय बंद हो गए। लुधौरी के पत्थर कारोबारी बदरुद्दीन बताते हैं कि पहले हम कोयलाबास और जरवा से हरियाणा, पंजाब, लखनऊ और राजधानी क्षेत्र तक पत्थर और गिट्टी सप्लाई करते थे। कोयलाबास में मंडी लगती थी, जहां विदेशी वस्त्र, इलेक्ट्रॉनिक सामान और जापानी रेडियो भी बिकते थे। राजनीतिक उपेक्षा से धीरे-धीरे यहां व्यवसाय बंद हुआ। देखते ही देखते सब उजाड़ हो गया।
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तरक्की की उम्मीद



-भड़सहिया से नेपाल की आवाजाही के लिए रास्तों की तैयारी जारी।

-लोग स्वरोजगार की संभावनाओं को लेकर उत्साहित।

-जंगल संरक्षित होने से पर्यावरण और व्यापार दोनों पर असर पड़ा।



-सीमा सुरक्षा बल और बॉर्डर फोर्स की मौजूदगी से सुरक्षा का बढ़ा भरोसा।

-युवा और महिलाएं स्थानीय व्यापार और स्वरोजगार के लिए जागरूक।
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