बलरामपुर। देश को दहलाने की बड़ी साजिश के बाद अबू यूसुफ परिवार सहित विदेश भागने की फिराक में था। इसकी तैयारी उसने पहले से कर रखी थी। उसने खुद के अलावा पत्नी व चार छोटे बच्चों का भी पासपोर्ट बनवाया था। सीरिया तथा अफगानिस्तान में आईएसआईएस के लड़ाकों पर अमेरिका के हमले से वह बेहद नाराज था। इस्लामिक स्टेट ऑफ खुरासान प्राविंस अफगानिस्तान (आईएसकेपी) के भारतीय हैंलर्स के संपर्क में आकर उसने जेहादी रास्ता अख्तियार कर लिया था।
उतरौला कोतवाली क्षेत्र के ग्राम बढ़ाया भैंसाही निवासी दिल्ली में गिरफ्तार संदिग्ध आईएस आतंकी मुस्तकीम खान उर्फ अबू युसुफ की मानसिकता वर्ष 2014-15 में उत्तराखंड में काम करते वक्त गिरने से घायल होने के बाद बदली थी। आराम करने के वक्त वह ज्यादातर वक्त मोबाइल पर धार्मिक वीडियो ही देखता रहता था। इसी बीच उसने आईएस संगठन की विस्तारवादी सोच का भी वीडियो देखा और उससे प्रभावित हुआ। अमेरिका के प्रति उसके मन में आईएस का विरोध करने के कारण नफरत भर गई। वह जाकिर नाईक व अन्य कट्टरपंथी धर्मगुरुओं का वीडियो भी खूब देखता था।
घर लौटने के बाद उसने टेलीग्राम ऐप के जरिए आईएसकेपी के भारतीय हैंडलर्स संपर्क में आ गया। उन्होंने ही मुस्तकीम को सबसे पहले अपना और अपने परिवार का पासपोर्ट बनवाने के लिए कहा। वर्ष 2017 में ही अपनी पत्नी तथा चार बच्चों का पासपोर्ट बनवाकर अपने खतरनाक मंसूबों को अमली जामा पहनाना शुरू कर दिया। इसके बाद घर पर ही बारूद व अन्य सामान एकत्र कर मानव बन बनाने की तकनीक सीखी और दिल्ली दहलाने की साजिश रचने लगा। इसके लिए वह प्रेशर कुकर बम का इस्तेमाल करने वाला था। बड़ी घटना को अंजाम देने के बाद पत्नी व बच्चों सहित उसके विदेश भागने की योजना थी। हालांकि इसी बीच आईबी की खुफिया रिपोर्ट पर दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने उसे गिरफ्तार कर मंसूबों पर पानी फेर दिया।
घर में ही सीखता था निशानेबाजी, बना रखा था टार्गेट
अबू युसुफ बढ़या भैसाही गांव स्थित अपने ही घर में टार्गेट बनाकर एयर गन से निशानेबाजी सीखता था। यह खुलासा दिल्ली पुलिस की छानबीन के दौरान हुआ है। उसकी मंशा अमेरिकियों को भारी नुकसान पहुंचाने की थी। वह अमेरिकियों को मारने के लिए खुद स्लीपर सेल बनने के लिए पहले तैयार था। बाद में बच्चे होने के बाद उसने अपनी मंशा बदल दी और लोन वुल्फ अटैक (खुद अपने दम हमले की प्लानिंग करने वाले) की साजिश में शामिल हो गया है।