बलरामपुर। जिले के आठ सौ ग्राम पंचायतों में एडीओ पंचायत प्रशासक होंगे। ग्राम पंचायतों में प्रशासक तय हो गए हैं। 25 दिसंबर को प्रधानी का कार्यकाल पूरा होने के बाद जिले के सभी नौ ब्लॉकों के एडीओ पंचायत अब प्रशासक पद की जिम्मेदारी संभालेंगे।
ग्राम प्रधानों के स्थान पर एडीओ पंचायत के कंधों पर ग्राम पंचायतों के विकास कार्यों का जिम्मा होगा। ग्राम पंचायत सचिवों के साथ 26 दिसंबर से ग्राम पंचायत के खातों का संचालन करेंगे। इसके बाद ग्राम प्रधानों की दखल विकास कार्यों में खत्म हो जाएगी। प्रशासकों के माध्यम से ग्राम पंचायतों के अधूरे कार्य पूरे कराए जाएंगे।
जिले में करीब 90 करोड़ की परियोजनाएं मार्च 2020 तक पूरी होनी हैं। प्रशासक के हाथों में प्रधानी की कमान जाने से चिंता सता रही है।
ग्राम पंचायतों के प्रधानी कार्यकाल में अब सिर्फ तीन दिन बचे हैं। शासन स्तर से ग्राम पंचायतों में प्रधानी के दायित्वों का निर्वहन करने के लिए एडीओ पंचायतों को प्रशासक बनाने की तैयारी की जा रही है।
प्रशासक की तैनाती होने को लेकर ग्राम प्रधानों को गांवों के विकास को लेकर चिंता सताने लगी है। गांवों में निर्माणाधीन पंचायत भवनों, सामुदायिक शौचालयों, प्राथमिक, उच्च प्राथमिक व कंपोजिट स्कूलों के 14 पैरामीटर पर कायाकल्प, आंगनबाड़ी भवनों, नाली-खड़ंजा के साथ-साथ मनरेगा कार्यों के प्रभावित होने की आशंका प्रधानों को सता रही है।
जिले के सभी 800 ग्राम पंचायतों में प्रशासक तैनात किए जा रहे हैं। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव 2015 में निर्वाचित प्रधानों के चुनाव परिणाम की घोषणा 13 दिसंबर को की गई थी लेकिन ग्राम पंचायतों का गठन करने के बाद पहली बैठक 26 दिसंबर को हुई थी। डीपीआरओ नीलेश प्रताप सिंह ने बताया कि सभी ग्राम पंचायतों के सचिवों को अधूरे विकास कार्यों को शीघ्र पूरा कराने का निर्देश दिया जा चुका है।
उधर प्रधानों को ग्राम पंचायतों में प्रशासक की व्यवस्था रास नहीं आ रही है। ग्राम प्रधान गोड़वा ओमकांत तिवारी, शिवानगर मोहम्मद उमर शाह, टेढ़वा शिव प्रसाद यादव व मथुरा मोहम्मद सगीर आदि का कहना है कि प्रधानों को ही प्रशासक बनाया जाना चाहिए। अधिकारियों के हाथ में पंचायत की कमान जाने से जनता को सुनवाई में दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा।
चुनाव होने तक प्रधानों को ही काम करने देना चाहिए। प्रशासक बैठाने से विकास कार्य प्रभावित होते हैं। जनहित के लिए प्रधानों के अधिकार को बहाल रखें जिससे शुरू किये गए विकास कार्य समय पर पूरे हो सकें। विकास कार्यों में निर्वाचित प्रधानों के सुझावों को ही प्राथमिकता दी जानी चाहिए। प्रधानों को ही प्रशासक बनाया जाए।
एडीओ पंचायतों को मिलेगा प्रशासक का जिम्मा
जिले के सभी 800 ग्राम पंचायतों का कार्यकाल 25 दिसंबर को पूरा हो जाएगा। ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों की देखरेख के लिए जिले के सभी नौ ब्लॉकों के एडीओ पंचायतों को प्रशासक का जिम्मा सौंपा जाएगा। एडीओ पंचायत अपने ब्लॉक के सभी ग्राम पंचायतों में तैनात सचिवों के साथ मिलकर अधूरे विकास कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर समय से गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूरा कराएंगे, जिससे गांव के लोगों को सरकारी योजना का लाभ मिल सके।
- अमनदीप डुली, सीडीओ