बलरामपुर। नगर पालिका परिषद बलरामपुर का इतिहास 135 साल पुराना है। 25 वर्षों तक प्रशासकों ने नगर पालिका बलरामपुर का संचालन किया। अंग्रेज अफसर व बलरामपुर राजपरिवार के बाद सदर एसडीएम रहे अधिकारियों ने प्रशासक के रूप में नगर के विकास में अहम भूमिका निभाई है। अध्यक्ष का अधिकार समाप्त अथवा उसे सीज कर दिए जाने पर जिला प्रशासन की तरफ से प्रशासक की नियुक्ति की जाती है। प्रशासकों के कुर्सी संभालते ही विभागीय कार्यों में राजनीतिक हस्तक्षेप कम हो जाता है।
नगर पालिका परिषद बलरामपुर का गठन सन 1887 में हुआ था। सबसे पहले अंग्रेज और फिर बलरामपुर राजपरिवार के सदस्य मनोनयन के आधार पर चेयरमैन बनते रहे। 1928 में कुंवर यशवीर सिंह के कुर्सी से हटने पर तत्कालीन पीसीएस अधिकारी रहे डिप्टी दुर्गा प्रसाद नगर पालिका बलरामपुर के पहले स्थायी प्रशासक बने। उसके बाद से अब तक 14 स्थायी प्रशासक बन चुके हैं। इनमें से सबसे लंबा कार्यकाल डिप्टी दुर्गा प्रसाद सिंह का (पांच साल) रहा है। इन प्रशासकों का पूरा विवरण नगर पालिका कार्यालय में लगे बोर्ड पर आज भी अंकित है।
कौन, कब बना प्रशासक
सन 1928 में डिप्टी दुर्गा प्रसाद पहले प्रशासक बने। इसके बाद सन 1951 में कटार सिंह, 1952 में पीआर भीमन, 1953 में शफीकुल हसन, 1977 में जनार्दन उपाध्याय, 1979 में परदेशी राम, 1980 में रघुराज सिंह प्रशासक बने। इसी तरह सन 1982 में राजीव खेर, 1984 में हीरामणि मिश्र, 1985 में बाबूलाल अग्रवाल, 1986 में लालजी राय, 1990 में दिग्विजय सिंह, 1994 में सूर्य लाल सिंह तथा 1995 में पीसीएस अधिकारी बाल कृष्ण नगर पालिका के प्रशासक रह चुके हैं।
1995 के बाद नहीं हुआ स्थायी प्रशासक
सन 1995 में प्रमुख पार्टियों ने पहली बार अपने निशान पर निकाय चुनाव में प्रत्याशी उतारे थे। उसके बाद से अब तक नगर पालिका बलरामपुर में कोई स्थायी प्रशासक नियुक्त नहीं हुआ है। 1995 से अब तक अध्यक्ष का कार्यकाल समाप्त होने से लेकर नया अध्यक्ष बनने तक ही पालिकाध्यक्ष की बागडोर जिला प्रशासन के हाथ में रही है।