बलरामपुर। दैवीय आपदा की स्थिति में जन धन को नुकसान से बचाने की कवायद में प्रशासनिक अमला जुटा है। इसके तहत बाढ़ व भूंकप की स्थिति में आपदा प्रबंधन के माध्यम से होने वाले बचाव की जागरूकता से जुड़े कार्यक्रमों का आयोजन कर मॉकड्रिल के माध्यम से लोगों को दैवीय आपदा से बचाव के बारे में जानकारी भी दी जा रही है। साथ ही आपदा में मददगार साबित होने वाले आपदा मित्रों की तैनात के साथ ही बाढ़ की विभीषिका से निपटने को नाव, नाविक व गोताखोरों को भी मुस्तैद किया गया है।
दैपीय आपदा से निपटने के लिए ही वैश्विक स्तर पर 13 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण दिवस मनाया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य प्राकृतिक आपदा की रोकथाम व प्रबंधन के लिए पुख्ता तैयारी रखना है ताकि आपदा आने पर जानमाल का नुकसान कम से कम हो सके। बलरामपुर जिला पहले ही बाढ़ व भूकंप प्रभावित क्षेत्र में आता है। जिलाधिकारी अरविंद सिंह ने बताया कि जिले में आपदा प्रबंधन के तहत नियमित तौर पर कार्यक्रम आयोजित कर लोगों को जागरूक बनाया जा रहा है।
जिला आपदा प्रबंधन की तरफ से लोगों की मदद के लिए 300 आपदा मित्रों को प्रशिक्षित किया गया है। सभी आपदा मित्रों को सेफ्टी किट मुहैया कराई गई है। जिले में बाढ़ प्रभावित चिन्हित 85 गांवों में नाव की खरीदारी की गई है। जिले की तीनों तहसीलों में भी स्वचालित मौसम केंद्र और सभी ब्लाॅक में वर्षा रेनगेज लगाने की तैयारी भी है। अर्ली वार्निंग सिस्टम के लिए सभी मोबाइल नंबरों पर आपदा पूर्व चेतावनी जारी करने के ट्रायल के साथ ही आपदा में लोगों को तत्काल मदद मुहैया कराने के लिए तहसील स्तर पर एक कंट्रोल रूम का संचालन भी शुरू कराया गया है।