बलरामपुर। कृषि विभाग में खाद कारोबारियों से एंट्री फीस वसूलने के आरोप में गिरफ्तार वरिष्ठ सहायक राघवेंद्र पटेल को रविवार को भ्रष्टाचार निवारण न्यायालय गोंडा में पेश किया गया। न्यायाधीश नित्या पांडेय ने आरोपी को न्यायिक हिरासत में जेल भेजने का आदेश दिया। उधर, मामले की जांच आगे बढ़ने के साथ ही अब जिले के करीब 65 उर्वरक विक्रेताओं से पूछताछ की तैयारी शुरू हो गई है। माना जा रहा है कि इनके बयान धन उगाही के पूरे नेटवर्क और वसूली की वास्तविक तस्वीर सामने ला सकते हैं।
कोतवाली देहात पुलिस ने शनिवार को जिला कृषि अधिकारी कार्यालय में तैनात वरिष्ठ सहायक राघवेंद्र पटेल को गिरफ्तार किया था। उसके कब्जे से 99,800 रुपये नकद तथा कई स्टॉक एवं वितरण रजिस्टर बरामद किए गए थे। आरोप है कि वह स्टॉक एवं वितरण रजिस्टरों के सत्यापन और निर्गत करने के नाम पर उर्वरक कारोबारियों से दो हजार से पांच हजार रुपये तक वसूल रहा था।
रविवार को क्षेत्राधिकारी नगर के नेतृत्व में पुलिस टीम ने आरोपी को भ्रष्टाचार निवारण न्यायालय गोंडा में पेश किया। सुनवाई के बाद न्यायालय ने उसे न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया। पुलिस सूत्रों के अनुसार अब जांच का फोकस उन उर्वरक विक्रेताओं पर है, जिन्हें हाल के दिनों में रजिस्टर जारी किए गए थे।
विभागीय कार्रवाई की भी तैयारी
कृषि विभाग के अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि पुलिस जांच रिपोर्ट और विभागीय जांच के आधार पर आरोपी कर्मचारी के खिलाफ सेवा नियमावली के तहत भी कार्रवाई की जाएगी। जिला कृषि अधिकारी अमित कुमार ने बताया कि मामले की जांच निष्पक्ष ढंग से कराई जाएगी और दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।
किसानों से जुड़े सीजन में खुला मामला
-खरीफ सीजन के दौरान जिले में खाद की मांग तेजी से बढ़ रही है। ऐसे समय में स्टॉक एवं वितरण रजिस्टरों के सत्यापन के नाम पर धन उगाही का मामला सामने आने से उर्वरक वितरण व्यवस्था पर भी सवाल उठे हैं। प्रशासनिक अधिकारियों का मानना है कि समय रहते कार्रवाई न होती तो खाद वितरण और स्टॉक प्रबंधन में बड़े स्तर पर अनियमितताओं की आशंका पैदा हो सकती थी। अब जांच एजेंसियों की नजर पूरे प्रकरण की तह तक पहुंचने पर है।