फोटो-1-बलरामपुर के भारत-नेपाल सीमा जरवा में बन रहा प्रवेश द्वार ।-संवाद
जरवा। भारत-नेपाल मैत्री संबंधों की नई पहचान बनने जा रहा अंतरराष्ट्रीय प्रवेश द्वार पिछले दो माह से बारिश के कारण निर्माण की रफ्तार खो बैठा है। हालांकि गेट का अधिकांश ढांचा तैयार हो चुका है। 10 विशाल स्तंभों और लिंटर का काम पूरा हो गया है। अब फिनिशिंग, सुंदरीकरण और हाईटेक सुविधाओं का काम होना है। शासन से 31.85 लाख रुपये का अतिरिक्त बजट मिलने के बाद निर्माण में तेजी आने की उम्मीद है। मौसम साफ होते ही काम दोबारा शुरू कराने की तैयारी है।
करीब 123.06 लाख रुपये की लागत से बन रहा यह प्रवेश द्वार भारत-नेपाल के बीच सदियों पुराने सामाजिक और कारोबारी रिश्तों को नई पहचान देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। पांच खंडों में बनने वाले गेट का मध्य हिस्सा सबसे ऊंचा होगा। इस पर ‘भारत में आपका स्वागत है’ लिखा जाएगा। सौर ऊर्जा आधारित एलईडी तिरंगा रोशनी से सजाया जाने वाला यह गेट रात में सीमा क्षेत्र की अलग पहचान बनाएगा।
कोयलाबास-जरवा सीमा क्षेत्र दोनों देशों के लोगों के लिए केवल अंतरराष्ट्रीय सीमा नहीं, बल्कि सामाजिक और व्यापारिक संपर्क का प्रमुख माध्यम भी है। सीमावर्ती क्षेत्रों के लोगों के बीच लंबे समय से आवागमन और कारोबार का रिश्ता रहा है। ऐसे में प्रवेश द्वार के तैयार होने से नेपाली नागरिकों और भारतीयों के लिए मैत्री और स्वागत का संदेश और मजबूत होगा। कार्य प्रभारी सहायक अभियंता राम नरेश ने बताया कि बजट मिलने से काम जल्द पूरा होने की उम्मीद है।
कारोबार बढ़ने की जगी उम्मीद, हाईटेक सुरक्षा से होगा लैस
प्रवेश द्वार के साथ सीमा क्षेत्र में बेहतर प्रकाश, सुरक्षा और व्यवस्थित आवागमन की सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इससे स्थानीय कारोबारियों को व्यापार बढ़ने की उम्मीद है। व्यापारियों का मानना है कि बुनियादी सुविधाएं मजबूत होने से आवागमन बढ़ेगा और बाजार, परिवहन तथा छोटे कारोबार को लाभ मिलेगा। नेपाल से खरीदारों और कारोबारियों की आवाजाही बढ़ने पर तुलसीपुर और आसपास के बाजारों को भी फायदा हो सकता है।
प्रवेश द्वार पर सीसीटीवी कैमरे, बैरिकेडिंग और पैदल पथ की व्यवस्था होगी। इंटरलॉकिंग और हरित पट्टी से परिसर को आकर्षक बनाया जाएगा। सोलर आधारित प्रकाश व्यवस्था रात में रोशनी के साथ ऊर्जा बचत का माध्यम भी बनेगी।