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Balrampur News: फर्जीवाड़ा कर 92 की शिक्षक पद पर हो चुकी है भर्ती

Tue, 03 Feb 2026 10:43 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
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बलरामपुर स्थित बीएसए कार्यालय।
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बलरामपुर। जिले के परिषदीय विद्यालयों में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर शिक्षक पद पर नियुक्ति पाने में अब तक 92 शिक्षकों के खिलाफ एफआईआर हो चुकी है। इनमें 28 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि शेष 64 की तलाश जारी है। पुलिस अधिकारियों का दावा है कि आरोपियों की तलाश के लिए पुलिस टीम लगी है। हाईकोर्ट से फर्जीवाड़ा करके नौकरी हालिस करने वालों की एक बार फिर पड़ताल शुरू होगी।
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तत्कालीन बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) डॉ. रामचंद्र ने 31 मार्च 2021 को एफआईआर के आदेश दिए थे। जिसमें कुछ फर्जीवाड़ा करके नौकरी हासिल करने वालों के 75 खिलाफ नगर कोतवाली में प्राथमिकी दर्ज हुई थी। वहीं 17 के खिलाफ पचपेड़वा में भी रिपोर्ट दर्ज हुई थी। एफआईआर में आरोप लगाया गया था कि अभ्यर्थियों ने कूटरचित शैक्षिक व अन्य दस्तावेजों के सहारे बेसिक शिक्षा विभाग में नौकरी हासिल कर ली।

अभिलेखों के सत्यापन के दौरान ही फर्जीवाड़ा पकड़ में आ गया था। इससे वेतन नहीं जारी हुआ था। फिर भी विभाग आकलन कराने में लगा है कि किसी का वेतन जारी हुआ हो तो उससे वूसली की कार्रवाई की जाए। अब विभाग भर्तियों में सतर्कता बरत रहा है।
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पचपेड़वा में भी दर्ज हुई थी एफआईआर

इसी क्रम में अप्रैल 2021 के बाद कार्रवाई तेज करते हुए खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) ने बीएसए के निर्देश पर पचपेड़वा थाने में 17 शिक्षकों के खिलाफ तहरीर दी। इन पर फर्जी अभिलेख लगाकर नौकरी प्राप्त करने का आरोप है। जिन शिक्षकों के विरुद्ध केस दर्ज कराया गया है, उनमें कौशल किशोर त्रिपाठी, इरशाद अहमद, मोहम्मद इकबाल खान, अजीमुद्दीन, मोहम्मद इकबाल, रामपाल सिंह, मनोज कुमार यादव, शिव कुमार यादव, विजय प्रकाश, नीरज कुमार, दिनेश कुमार, विपिन कुमार, अर्पित मिश्र, गोविंद राम, अभिषेक कुमार, मनोज कुमार दूबे व मनीष कुमार सिंह के नाम शामिल हैं।


विद्यालयों में शिक्षकों कमी, पात्र अभ्यर्थी चयन का नहीं हो सका चयन
फर्जीवाड़े से नौकरी हासिल करने से बेसिक शिक्षा विभाग को दोहरा नुकसान हुआ। एक तो पिछड़े जिले में शिक्षकों की कमी बनी रही। कुछ दिनों में ही फर्जी अभिलेख से नौकरी करने वाले पकड़ गए और सेवा समाप्त कर दी गई। इससे विद्यालयों में पढ़ाई प्रभावित हुई। शिक्षक नेता विनय तिवारी कहते हैं कि पात्र अभ्यर्थियों का चयन भी नहीं हो सका। 92 वास्तविक अभ्यर्थी बेरोजगार ही रह गए। उन्होंने मांग किया कि भर्तियों में पारदर्शिता होनी चाहिए।

नियमित की जा रही है जांच, अभिलेखों का होता है सत्यापन
शिक्षक भर्ती से जुड़े अभिलेखों की नियिमित जांच हो रही है। जिलों में फर्जीवाड़ा करके नौकरी पाने वालों के खिलाफ कार्रवाई भी हुई है। अभिलेखों का सत्यापन कराने के बाद ही अब वेतन निर्गत किया जाता है। अभी भी जांच की जा रही है। जिन शिक्षकों के वेतन जारी हुए होंगे, उनसे रिकवरी कराई जाएगी।
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- शुभम शुक्ल, बीएसए
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