जेल दीवान, सिपाही और फार्मासिस्ट पर बंदी की हत्या का केस
बलरामपुर। जिला जेल में विचाराधीन बंदी की मौत के मामले में नया मोड़ आ गया है। जेल में मामले की जांच करने पहुंचे एडीएम तथा एएसपी को बंदियों ने बताया कि बंदी की मौत जेल के दीवान, सिपाही तथा फार्मासिस्ट की पिटाई से हुई है।
बंदी रोमी गुप्ता की तहरीर पर देहात थाने में दीवान, सिपाही व फार्मासिस्ट के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज कर लिया गया है। मामले की विवेचना प्रभारी निरीक्षक देहात थाना कर रहे हैं।
प्रभारी निरीक्षक देहात जितेन्द्र बहादुर सिंह ने बताया कि विचाराधीन बंदी की रहस्यमय मौत के मामले में डीएम कृष्णा करूणेश ने एडीएम न्यायिक रामानुज सिंह तथा एएसपी एसके सिंह को जांच के लिए रविवार को जेल भेजा था।
जांच के दौरान अन्य बंदियों ने बताया कि विचाराधीन बंदी धर्मराज सोनकर ने सिरदर्द होने की शिकायत की। रात करीब 9.30 बजे जेल के हेड चीफ दीवान श्याम मनोहर मिश्र, सिपाही राधेश्याम सत्यार्थी तथा जेल अस्पताल के फार्मासिस्ट अशफाक बैरक में आए और धर्मराज को बैरक से बाहर निकाला।
इन लोगों ने धर्मराम को बुरी तरह से पीटा। पिटाई के दौरान धर्मराज के मुंह से खून भी निकल रहा था। इन लोगों ने बिना इलाज किए ही धर्मराज को जेल अस्पताल में बंद कर दिया। सुबह जब यह लोग अस्पताल पहुंचे तो धर्मराज की मौत हो चुकी थी।
उसे फर्जी ढंग से जीवित दिखाकर इलाज के लिए जिला अस्पताल ले जाया गया। बंदी की मौत कारागार में पिटाई के कारण हुई है। यही नहीं बंदियों ने एडीएम व एएसपी के सामने प्रदर्शन कर दोषियों के खिलाफ केस दर्ज करने की मांग भी की थी।
अधिकारियों की जांच रिपोर्ट तथा डीएम के निर्देश पर बंदी रोमी गुप्ता निवासी मोहल्ला पहलवारा बलरामपुर नगर की तहरीर पर जेल के हेडचीफ श्याम मनोहर मिश्रा, सिपाही राधेश्याम सत्यार्थी तथा फार्मासिस्ट अशफाक के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज किया गया है। मामले की विवेचना प्रभारी निरीक्षक खुद कर रहे हैैं।
पूर्व मंत्री ने की न्यायिक जांच की मांग
जिला जेल में बंदी धर्मराज सोनकर की मौत का मामला राजनीतिक रंग लेने लगा है। पूर्व मंत्री तथा सपा नेता डॉ. एसपी यादव ने बताया कि धर्मराज को आबकारी टीम के लोगों ने गांव के बाहर से पकड़कर जमकर पीटा।
यह लोग धर्मराज की पत्नी से उसे छोड़ने के लिए पैसा मांग रहे थे। पैसा न मिलने पर धर्मराज को जेल भेज दिया गया और उसकी वहां हत्या हो गई। बंदी की मौत के मामले की न्यायिक जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए।