बलरामपुर। हर साल बाढ़ और आग जैसी आपदाओं से जूझ रहे ग्रामीणों के लिए अब राहत की बड़ी पहल शुरू हुई है। प्रशासन ने 712 युवाओं को ‘आपदा मित्र’ के रूप में तैयार करने का फैसला लिया है, जो संकट की घड़ी में गांवों के लिए पहली मदद बनकर सामने आएंगे। खास बात यह है कि ये युवा उसी इलाके से होंगे, जहां हर साल लोग आपदा की मार झेलते हैं।
इस योजना के तहत 300 एनसीसी, 150 एनएसएस, 150 नेहरू युवा केंद्र और 172 स्काउट-गाइड के युवाओं को चुना गया है। इनमें से 472 युवाओं को आवासीय प्रशिक्षण दिया जाएगा, जबकि 150 एनसीसी कैडेटों को अनावासीय प्रशिक्षण के जरिए आपदा प्रबंधन की बारीकियां सिखाई जाएंगी। प्रशिक्षण में बचाव कार्य, प्राथमिक उपचार, आग बुझाने के तरीके, बाढ़ के दौरान सुरक्षित निकासी और राहत वितरण जैसी जरूरी तकनीकों पर विशेष जोर रहेगा।-संवाद
गांव के युवा ही बनेंगे संकट के ‘पहले सहायक’
अब तक आपदा के समय बाहरी मदद पहुंचने में देरी हो जाती थी, जिससे नुकसान बढ़ जाता था। लेकिन ‘आपदा मित्र’ बनने वाले ये युवा गांवों में ही मौजूद रहेंगे और घटना के तुरंत बाद राहत कार्य शुरू कर सकेंगे। इससे न सिर्फ लोगों की जान बचाने में मदद मिलेगी, बल्कि नुकसान को भी काफी हद तक कम किया जा सकेगा। आपदा से बचाव के लिए ग्रामीणों को जागरूक भी करेंगे। साथ ही विभाग को समय-समय पर रिपोर्ट देंगे।
अग्निकांड की बढ़ती घटनाएं बनीं चेतावनी
हाल के दिनों में जिले में आग लगने की घटनाओं ने हालात की गंभीरता को उजागर कर दिया है। 04 अप्रैल को उतरौला क्षेत्र में खेतों में लगी आग से छह एकड़ से अधिक फसल जल गई। उसी दिन हरैया क्षेत्र के सहिजना गांव के दो मजरों में पांच झोपड़ियां राख हो गईं। 05 अप्रैल को ललिया क्षेत्र के मथुरा बाजार में मकान में आग लग गई, जबकि 07 अप्रैल को बघेलखंड जंगल और 14 अप्रैल को सोहेलवा जंगल में आग से बड़े इलाके प्रभावित हुए। इन घटनाओं ने साबित कर दिया कि त्वरित और प्रशिक्षित प्रतिक्रिया ही सबसे बड़ा बचाव है।
हर साल बाढ़ से जूझते सैकड़ों गांव
जिले में करीब 300 गांव हर साल बाढ़ की चपेट में आते हैं। सदर तहसील के गंगापुर बांकी, धुधुलपुर, चौकाकला, सरदारगढ़, टेंगनहिया, मानकोट, कल्यानपुर, झौहना, करमहना और बेला जैसे गांवों में हर वर्ष पानी घरों तक पहुंच जाता है। इससे लोगों को घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ता है और फसल व सामान का भारी नुकसान होता है।