बलरामपुर। राप्ती नदी व पहाड़ी नालों की बाढ़ के कारण दो साल पहले तबाह हुई फसल की मुआवजा राशि पाने का इंतजार अभी भी क्षेत्र के पांच हजार किसान कर रहे हैं। उस समय नुकसान का सर्वे करके 92 हजार 324 किसानों को फसल के नुकसान की भरपाई का मुआवजा देने के लिए चिह्नित किया गया था। बैंक खातों में गड़बड़ी व अन्य खामियों के कारण इनमें से 5400 किसानों को दो साल बाद भी मुआवजा राशि का भुगतान नहीं हो सका है।
वंचित किसानों को मुआवजा राशि मुहैया कराने के लिए डीएम ने पुन: शासन को एक प्रस्ताव भेजकर बजट की मांग की थी। इसके बाद मुआवजा राशि का आवंटन हो जाने के बावजूद विभागीय अफसरों की शिथिलता से अभी तक किसानों को उनके मुआवजे की राशि का भुगतान नहीं हो सका।
बाढ़ की तबाही से वित्तीय वर्ष 2022-23 में तीनों तहसीलों के 92,324 किसानों को फसल नुकसान की भरपाई के लिए 25.17 करोड़ रुपये का बजट मिला था। इसमें तहसील सदर के 42562, उतरौला के 27031 व तुलसीपुर के 23733 किसानों को फसल नुकसान देने के लिए चयनित किया गया था। निष्क्रिय बैंक खाता व अन्य कमियों के चलते मुआवजा भुगतान के लिए आवंटित हुई 1.16 करोड़ की रुपये की धनराशि बिना भुगतान के ही शासन को वापस हो गई थी।
वित्तीय वर्ष 2021-22 में भी 1200 किसानों को बाढ़ से हुए फसल के नुकसान का 33 लाख रुपये का मुआवजा अभी तक नहीं मिल सका है। जिला आपदा प्रबंधक अरुण सिंह ने बताया कि लंबित मुआवजा राशि के भुगतान की प्रक्रिया चल रही है। इसके लिए तहसीलों से सत्यापन रिपोर्ट मांगी गई है। इसके आधार पर ही शासन से मिली मुआवजा राशि का भुगतान जल्दी सुनिश्चित किया जाएगा।
दो वित्तीय वर्ष के किसानों को मुआवजा देने से पहले तहसीलों से सत्यापन हो रहा है। ताकि इस बार किसानों के बैंक खातों आदि में कोई कमी न रहे। जिलाधिकारी अरविंद सिंह ने तीनों तहसीलों के अधिकारियों से चिह्नित किसानों के बैंक खातों की सत्यापन रिपोर्ट मांगी है। उन्होंने बताया कि भुगतान की कार्रवाई इसी माह से शुरू कराई जाएगी।