रेहरा बाजार (बलरामपुर)। स्थानीय ब्लॉक क्षेत्र के रतनपुर गांव की 50 महिलाएं अपने बूते स्वरोजगारी बनकर लोगों के लिए मिशाल बनी हैं। गांव की स्नातक महिला नीलम सिंह के प्रयास से महिलाओं ने कोविड-19 महामारी के समय अगरबत्ती व धूपबत्ती बनाने और पैकिंग करने का जिम्मा संभाला। कुटीर उद्योग से जुड़ीं महिलाएं दो सौ रुपये रोजाना कमाकर आत्मनिर्भर बनी हैं।
नीलम सिंह ने बताया कि छह माह पहले उनकी शादी हुई और उसी दौरान कोरोना महामारी के बढ़ते प्रकोप के चलते देश भर में लॉकडाउन हुआ और लोग गरीबी व बेरोजगारी की मार झेलने लगे। परिवार का खर्च चलाने में लोगों के समक्ष काफी दिक्कतें आ गईं। अपने परिवारीजनों से बात करके अगरबत्ती व धूपबत्ती बनाने वाली मशीन घर में लगवाया। एक माह पहले गांव की महिलाओं से बात करके उन्हें रोजगार के अवसर दिलाने के लिए प्रेरित किया। इस पर गांव की 50 महिलाओं ने कुटीर उद्योग से जुड़ने का फैसला लिया।
बताया कि महिलाओं के साथ मैंने स्वयं भी मशीन चलाकर अगरबत्ती व धूपबत्ती बनाने का काम शुरू किया। कारोबार से जुड़ीं महिलाओं के परिवार के लोग आसपास के बाजारों में अगरबत्ती व धूपबत्ती बेचने में सहयोग कर रहे हैं। नीलम के इस शानदार प्रयास की क्षेत्रवासी उमेश पाल सिंह, इंजीनियर अखंड प्रताप सिंह, अर्जुन चौरसिया, इंजीनियर अमरपाल सिंह, पारसनाथ सिंह, माता प्रसाद सिंह व पिंकू सिंह आदि ने सराहना की और प्रशासन से गांव-गांव ऐसे ही कुटीर उद्योगों को बढ़ावा देने की अपील की।
स्वरोजगार से जुड़ीं अंजू सिंह, राजपता सिंह, बेबी सिंह, मलिका सिंह, कृष्णा सिंह व उषा सिंह आदि ने नीलम सिंह के प्रयास की तारीफ की और कहा कि मेहनत करके प्रत्येक महिला रोजाना 180 से 215 रुपये तक की कमाई कर रही हैं। परिवार का खर्च चलाने के लिए मोहताज नहीं हैं। इसी रोजगार को भविष्य में और बेहतर बनाने पर सभी महिलाएं प्रयास कर रही हैं।