बलरामपुर। महाविद्यालयों में स्नातक में दाखिले को लेकर मात्र सात दिन शेष बचे हैं, लेकिन अभी तक आधे से भी कम सीटों पर दाखिल हो सका है। विशेषज्ञों का कहना है कि इसके लिए कई कारण जिम्मेदार हैं। पहला तो नई शिक्षा नीति को लेकर विद्यार्थियों में भ्रम है, वहीं दूसरा प्रोफेशन कोर्स के प्रति युवाओं का रुझान बढ़ने के कारण वह स्नातक में प्रवेश नहीं ले रहे हैं।
जिले में इस वर्ष करीब 13 हजार छात्र-छात्राओं ने इंटरमीडिएट की परीक्षा पास की है। जिले में आठ डिग्री कॉलेज संचालित हैं, जिसमें करीब सात हजार स्नातक की सीटें हैं। स्नातक कक्षाओं में सभी विषयों में प्रवेश प्रक्रिया चल रही हैं, लेकिन छात्र दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं। एमएलके महाविद्यालय में कला संकाय में 1800 सीटें आवंटित हैं, जिसमें से दो अगस्त तक मात्र 586 बच्चों ने ही दाखिला लिया है। इसी तरह बीएससी, बीकॉम आदि कक्षाओं में भी 50 फीसदी से कम ही दाखिला हो सका है। महाविद्यालयों में स्नातक के लिए अंतिम तिथि 10 अगस्त निर्धारित की गई है।
एमएलके महाविद्यालय में दो अगस्त तक के आंकड़े
कोर्स - सीटें - दाखिला
बीए -1800 - 586
बीएससी(बायो) -600 - 234
बीएससी(मैथ) -240 - 61
बीकाॅम -240 - 88
बीबीए -60 - 49
एनईपी को लेकर भ्रमण की स्थिति
-विद्यार्थियों के मन में नई शिक्षा नीति को लेकर अभी भी असमंजस है। इसके चलते पहले की तुलना में विद्यार्थी कॉलेज की जगह आईटीआई या तकनीकी संस्थानों में दाखिला लेना पसंद कर रहे हैं। दूसरा कारण ये भी है कि 12वीं के बाद विद्यार्थी को पता नहीं है कि बीए या फिर एमए करने के बाद करेंगे क्या और क्या बनेंगे। महाविद्यालय में संचालित व्यवसायिक कोर्सों में युवाओं का रुझान बढ़ रहा है, और इसमें अधिक प्रवेश छात्र ले रहे हैं।
प्रो. जेपी पांडेय, प्राचार्य एमएलके महाविद्यालय