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Balrampur News: 25 साल पहले था मिनी मुंबई, अब खामोशी ने घेर लिया है कारोबार

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बलरामपुर के म​​णिपुर बाजार में खरीदारी करते लोग ।-संवाद
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जरवा। भारत-नेपाल सीमा स्थित कोयलाबास व जरवा कस्बा पहले व्यापारिक दृष्टि से मिनी मुंबई कहा जाता था। रौनक ऐसी थी कि देशभर के व्यापारी पत्थर, गिट्टी, मोरंग, बालू और कोयले की खरीद-फरोख्त के लिए यहां पहुंचते थे। राजनीतिक षड्यंत्र के कारण कोयलाबास वीरान और सूना पड़ा है। अब भंसार बहाली के प्रयास से यहां एक बार फिर रौनक लौटने की उम्मीद व्यापारियों में जगी है।
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स्थानीय व्यापारी हीरालाल यादव, विशंभर यादव, राघव राम थारू, पिंकू मिश्रा, अजीज और बब्बन ने बताया कि 25 वर्ष पूर्व गोंडा, मनकापुर, हरियाणा, पंजाब और नवाबगंज तक से व्यापारी यहां आते थे। मालगाड़ी से पत्थर और गिट्टी का कारोबार होता था। तुलसीपुर के संघी आढ़त का काम देखते थे और हरियाणा के कन्हैया लाल जोशी जैसे व्यापारी सरसों, मसूर, मक्का, अदरक और घी खरीदते थे।
कोयलाबास से सरसों का तेल कानपुर तक भेजा जाता था। नजदीकी गांवों के लिए बैलगाड़ी और घोड़ागाड़ी से लेन-देन होता था। यहां जींस, टेरीलीन और पॉलिस्टर के थान नेपाल से आते थे, जिन्हें लोग बड़ी पसंद से खरीदते थे। उस दौर में कोइलाबास का बाजार दिन-रात गुलजार रहता था।
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पुरानी बाजार के पूर्व प्रधान इबरार खान बताते हैं कि 25 वर्ष पूर्व तक यहां सैकड़ों गाड़ियां व्यापार के लिए पहुंचती थीं। बदलते हालात में व्यापारिक गतिविधियां ठप होने के कारण अब यहां सन्नाटा है। स्थानीय लोग उम्मीद जता रहे हैं कि सीमा पार दोनों देशों के रिश्ते और व्यापारिक समझौते अगर और मजबूत हुए तो एक बार फिर कोयलाबास की रौनक लौट आएगी।
मित्र देश से गहरे हुए रिश्ते, सीमा पर गुलजार दिखा मणिपुर बाजार
हरैया सतघरवा।
भारत-नेपाल सीमा पर रविवार को लगने वाला साप्ताहिक बाजार इस बार गुलजार रहा। बाजार में भारतीय के साथ ही बड़ी संख्या में नेपाली नागरिक भी खरीदारी के लिए पहुंचे। इससे दोनों देशों के बीच के मधुर संबंध एक बार फिर गहरे होते दिखे।
खंगरा नाका निवासी रमित बुड़मकर ने कहा कि भारत-नेपाल के बीच रिश्ते सिर्फ सरहद तक सीमित नहीं हैं, बल्कि आत्मीयता से जुड़े हैं। आंदोलन या अन्य समस्याओं के दौरान जब सीमा बंद रहती है, तब काफी दिक्कत होती है। अब हालात सामान्य हैं और लोग आसानी से बाजार में पहुंच रहे हैं।
डगमरा नाका क्षेत्र निवासी बहादुर ने कहा कि इस साप्ताहिक बाजार से उनकी आवश्यक वस्तुओं की पूर्ति होती है। दुकानदार मेवालाल ने बताया कि नेपाली नागरिकों के आने से बिक्री और रोजगार दोनों बढ़ जाते हैं। सब्जी विक्रेता रोशन अली ने कहा कि खेत की ताजी हरी सब्जियां यहां अच्छे दाम पर बिकती हैं, जिससे मुनाफा बढ़ जाता है। जगदीश प्रसाद कसौधन ने कहा कि यह बाजार सीमावर्ती क्षेत्र के लोगों के लिए रोजगार का अहम माध्यम है।
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