बलरामपुर। जिले में संचालित गोशालाओं में संरक्षित किए गए गोवंशों पर प्रतिमाह करीब पौने दो करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इसके बावजूद सड़कों पर गोवंशों का डेरा है। शहर की सड़कों के साथ राष्ट्रीय व राज्य राजमार्ग पर दिनभर गोवंशों का जमावड़ा रहता है। सुबह व शाम के समय इनकी संख्या और अधिक हो जाती है। अब जब कोहरा भी छाने लगा है, ऐसे में छुट्टा मवेशी दुर्घटना का सबब बन सकते हैं। बृहस्पतिवार को जब इसकी पड़ताल की गई तो हकीकत पता चली।
दृश्य एक - छुट्टा मवेशियों का अड्डा बना धोबैनिया नाला पुल
हरैया सतघरवा (बलरामपुर)। तुलसीपुर-चौधरीडीह राज्यमार्ग पर धोबैनिया नाला छुट्टा मवेशियों का अड्डा बन गया है। यहां पर आए दिन दुर्घटनाएं होती रहती हैं। इसके बावजूद विभागीय अधिकारी इसपर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। राहगीर संतोष कुमार, प्रमोद, राजेंद्र व इरफान आदि ने बताया कि गोशालाओं में केवल नाम के लिए पंजीकरण कर लिया जाता है, इसके बाद मवेशियों को छोड़ दिया जाता है।
दृश्य दो- राह चलना भी हुआ दूभर
महदेइया बाजार (बलरामपुर)। गुमड़ी-उतरौला राज्यमार्ग पर हमेशा छुट्टा मवेशियों का कब्जा रहता है। झुंड में निकलने वाले मवेशियों ने राहगीरों का चलना दूभर कर दिया हैं। राहगीर प्रवेश कुमार, शकील अहमद, पप्पू व मोहित आदि ने बताया कि छुट्टा मवेशी के चलते बीते एक सप्ताह में तीन से चार दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। इसके बावजूद विभाग पूरी तरह से उदासीन बना हुआ है।
दृश्य तीन- जी का जंजाल बने गोवंश
सादुल्लाहनगर (बलरामपुर)। अचलपुर चौधरी मार्ग पर छुट्टा जानवर लोगों के जी का जंजाल बने हुए हैं। आए दिन मवेशी आपस में लड़ते रहते हैं। जिसकी चपेट में आने से ई-रिक्शा, बाइक व साइकिल सवार घायल हो जाते हैं। राहगीर दिलीप बारी व राम सेवक ने बताया कि जगह-जगह गोशाला बनाकर मवेशियों को संरक्षित करने का दावा तो किया जाता है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। छुट्टा मवेशियों के कारण आए दिन लोग अपनी जान गवां रहे हैं। (संवाद)
फैक्ट फाइल :
अस्थाई गोशाला- 88
बड़ा गोशाला- 02
कांजीहाउस- 15
कान्हा गोशाला- 03
सभी गोशालाओं में संरक्षित मवेशी- 11497
चलाया जा रहा अभियान
जिले में समय-समय पर छुट्टा मवेशियों को पकड़ने के लिए अभियान चलाया जा रहा है। कुछ गोपालक अपने पालतू मवेशियों को भी दिन में छोड़ देते हैं। इससे वे भी सड़क पर आ जाते हैं। शीघ्र ही अभियान चलाकर मवेशियों को पकड़वाया जाएगा।
- डॉ. श्याम नगीमा राम, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी