पुरानी किताबों से ककहरा सीख रहे सवा दो लाख नौनिहाल
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बलरामपुर। जिले के 2.36 लाख नौनिहालों को पुरानी किताबों से ककहरा पढ़ाया जा रहा है। जिले के 2281 स्कूलों के छात्रों को 13 दिन बाद भी नई किताबों के वितरण की प्रक्रिया शुरु नहीं हो सकी है।
छात्रों के लिए नई किताबें देने के बारे में अभी तक कोई अता-पता नहीं है। नए शिक्षा सत्र में छात्रों को पढ़ने के लिए पुरानी किताबें ही थमा दी गई हैं।
समय से किताबें, जूते-मोजे व यूनिफार्म न मिलने से अभिभावकों में आक्रोश है। अभिभावकों व शिक्षकों ने नौनिहालों के साथ शासन पर उपेक्षा बरतने का आरोप लगाया है।
डीसी निरंकार पांडेय ने बताया कि नए शिक्षा सत्र 2019-20 में जिले के 2281 स्कूलों के करीब 2,36,352 छात्रों को नई किताबें दिया जाना है।
जिले के 1575 प्राथमिक स्कूलों में 1,80,989 तथा 646 उच्च प्राथमिक, 19 माध्यमिक, चार राजकीय, 12 सहायता प्राप्त एवं 25 मदरसों के 55,363 छात्रों के लिए 17 लाख नई किताबों का प्रस्ताव शासन को भेजा जा चुका है।
शासन स्तर से अभी तक करीब दो लाख नई किताबें भेजी गई है। जिले में अभी तक 15 लाख नई किताबें न मिलने से विद्यार्थियों को पुरानी किताबों से पढ़ाया जा रहा है। जिले के कुछ स्कूलों में शासन स्तर से आई दो लाख नई किताबों का वितरण कराया जा चुका है।
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अभिभावकों ने परिषदीय स्कूलों के बच्चों को नया शिक्षा सत्र बीतने के 13 दिन बाद भी नई किताबें न मिलने पर आक्रोश जताया है। अभिभावक परशुराम, मोहन, जग प्रसाद, स्वामीदयाल व दीपक आदि ने कहा कि हर साल छात्रों को नई किताबें समय से देने में हीलाहवाली बरती जा रही है।
नई किताबें न मिलने से छात्रों की पढ़ाई प्रभावित होती है। पुरानी किताबों से पढ़ने में छात्रों का मन भी नहीं लगता है। वहीं शिक्षकों ने भी शासन की लापरवाही पर आक्रोश जताया है।
शिक्षकनेताओं देव कुमार मिश्र, फैजान अंसारी, सचिन शुक्ला व बलवीर सिंह आदि ने आरोप लगाया है कि पिछले साल शिक्षा सत्र बीतने के आठ माह बाद किताबों का वितरण कराया गया था। चालू शिक्षा सत्र में भी नई किताबों के वितरण की प्रक्रिया में लेटलतीफ हो रहा है।
-डीएम कृष्णा करुणेश के निर्देश पर शिक्षा सत्र 2019-20 में जिला स्तरीय समिति के माध्यम से परिषदीय स्कूलों के छात्रों को 17 लाख नई किताबें मुहैया कराने के लिए पहले से ही शासन को प्रस्ताव भेजा जा चुका है।
शासन स्तर से अभी तक सिर्फ दो लाख किताबें भेजी गई हैं। स्कूलों के हेडमास्टरों व शिक्षकों को निर्देश दिया गया है कि जब तक नई किताबें नहीं आती हैं तब तक छात्रों को पुरानी किताबों से पढ़ाने की व्यवस्था करें।
हरिहर प्रसाद भारती, बीएसए